धनघटा। लोकसभा के चुनाव की तैयारी करने में जब सभी राजनीतिक पार्टियां लगी हुईं तो जिले में सपा कार्यकर्ता आपस में शह मात का खेल खेलने में लगे हैं। निकाय चुनाव में प्रत्याशियों को सिंबल दिलाने से लेकर मतदान की तिथि तक दो-दो हाथ करने वाले सपा कार्यकर्ता जिला कार्यकारिणी को लेकर भिड़ गए हैं।
जिलाध्यक्ष ने पांच दिन पहले जिस कार्यकारिणी का गठन किया उसे शुक्रवार को प्रदेश अध्यक्ष ने भंग करके यह संदेश दिया कि पार्टी नेतृत्व आपसी सामंजस्य से ही आगे कदम बढ़ाने के पक्ष में है। निकाय चुनाव में सपा ने नगर पंचायत हैंसर बाजार धनघटा और नगर पालिका खलीलाबाद में पहले क्रमश: मनीषा पासवान और जगत जायसवाल को पार्टी प्रत्याशी घोषित किया। उसके बाद उनके स्थान पर सुभावती चौहान और पवन छापड़िया को उम्मीदवार बना दिया। उसके बाद फिर अपने फैसले को बदलते हुए पार्टी नेतृत्व ने अपना समर्थन मनीषा पासवान और जगत जायसवाल को दे दिया, लेकिन चुनाव निशान साइकिल सुभावती चौहान और पवन छापडिया के पास ही रहा।
चुनाव में जगत जायसवाल तो जीत गए, लेकिन सपा समर्थित प्रत्याशी मनीषा पासवान को हार का मुंह देखना पड़ा। इस पर पार्टी नेताओं के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमा ही नहीं था कि जिलाध्यक्ष ने नई कार्यकारिणी का घोषणा कर दी। कार्यकारिणी को लेकर एक बार फिर सपाइयों के बीच घमासान शुरू हुई और यह लड़ाई पार्टी के प्रदेश कार्यालय तक पहुंच गई। इस पर प्रदेश अध्यक्ष ने शुक्रवार को जिलाध्यक्ष अब्दुल कलाम के जरिये घोषित कार्यकारिणी को भंग कर दी।
नई कार्यकारिणी के भंग होते ही सिपाहियों में सोशल मीडिया पर एक बार फिर वाक युद्ध शुरू हो गया है। कार्यकर्ता असमंजस्य में हैं। देखना है कि प्रदेश नेतृत्व पार्टी के भीतर चल रही खींचतान पर रोकथाम लगाने के लिए कौन सा कदम उठाता है।