- सीएमएस ने पकड़कर पुलिस का सौंपा, चिकित्सक ने आरोपी को छुड़ा लिया
- करीब आधे घंटे तक अफरा-तफरी का माहौल
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में बुधवार को एक बाहरी व्यक्ति मरीजों के ब्लड सैंपल की जांच कर रहा था। सूचना पर सीएमएस ने पहुंचकर उसे रंगे हाथ पकड़ लिया, जिसे पुलिस के हवाले कर दिया। इस दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। पकड़े गए बाहरी व्यक्ति को अस्पताल के एक चिकित्सक के दबाव में पुलिस ने छोड़ दिया। मामले की जानकारी होने पर सीएमएस ने चिकित्सक से जवाब तलब किया है।
अस्पताल की पैथोलॉजी में बुधवार को सुबह 11 बजे एक कमरे में जहां पर ब्लड का सैंपल निकाला जाता है। वहां आकर एक बाहरी व्यक्ति बैठ गया और ब्लड लेकर जांच करने का ढोंग करने लगा। अन्य कर्मचारियों ने उसे देखा तो इसकी सूचना सीएमएस को दी। सूचना पर तत्काल सीएमएस पहुंच गए और उस व्यक्ति को पकड़ लिया। इसके बाद उससे पूछताछ की तो उसने एक चिकित्सक का नाम बता दिया। इस दौरान कुछ अन्य युवक वहां से भाग खड़े हुए।
बताया जा रहा है कि युवक यहां से मरीजों को बाहर ले जाकर निजी पैथोलॉजी में ब्लड की जांच कराता है। इसमें अस्पताल के एक चिकित्सक का नाम उसने बताया है। उसी डॉक्टर के कहने पर यह कार्य करता है। इसके बाद सीएमएस ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर कलक्ट्रेट चौकी के पुलिसकर्मी पहुंच गए और उसे लेकर चौकी चले आए। बाद में चिकित्सक ने चौकी पर पैरवी कर उसे छुड़ा लिया। जिसे लेकर खूब चर्चा हो रही है।
एक साल पहले भी पकड़े गए तीन लोग
जिला अस्पताल में चिकित्सक के कक्ष में एक साल पहले भी तीन बाहरी युवक पकड़े गए थे। तत्कालीन सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने इन युवकों को पुलिस के हवाले कर दिया था। लेकिन तहरीर न मिलने पर पुलिस ने युवकों को छोड़ दिया था।
24 फरवरी को पकड़ी गई थी आशा कार्यकर्ता
जिला अस्पताल के ओपीडी के बाहर 24 फरवरी को एक आशा कार्यकर्ता मरीज को बाहर जांच कराने के लिए ले जा रही थी। उस दौरान शोर होने पर आशा कार्यकर्ता मौके से फरार हो गई थी। उसके बाद हल्ला मचा था। अस्पताल प्रशासन ने आशा कार्यकर्ता को चिह्नित करने की बात कही थी।
पैथोलॉजी में एक बाहरी व्यक्ति के बैठने की सूचना मिली तो मौके पर पहुंचे। देखा कि एक युवक ब्लड जांच करने का ढोंग कर रहा है। पूछताछ में उसने एक चिकित्सक का नाम बताया। उसने बताया कि डाॅक्टर ने ही बैठाया है। सीएमएस ने युवक को पुलिस को सौंप दिया, लेकिन बाद में युवक वहां से चला गया। चिकित्सक से जवाब तलब किया गया है। साथ ही सभी कर्मचारियों का पहचान पत्र बनवाकर दे दिया गया है। मरीज सिर्फ आईकार्ड लगाए कर्मचारी से पूछताछ करें, अन्य किसी से बात न करें।
- डॉ. भवनाथ पांडेय, सीएमएस