- जिला अस्पताल में ओरल कैंसर के हर साल 50 से 60 मरीज आते हैं
- मरीजों को बीआडी मेंडिकल कालेज किया जाता है रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला चिकित्सालय की ओपीडी में आने वाले मरीजों की जांच में हर माह चार से पांच मरीज ओरल कैंसर के मिलते है। कैंसर के इलाज, कीमोथेरेपी आदि की सुविधा न होने के कारण चिकित्सक इन मरीजों को बीआरडी मेडिकल काॅलेज गोरखपुर भेज देते हैं।
जिला अस्पताल के आकड़े के मुताबिक हर साल 50 से 60 मरीज ओरल कैंसर के आते हैं। जनपद में ओरल कैंसर के मरीजों की इससे भी बड़ी संख्या है। जो निजी चिकित्सकों के पास पहुंचते हैं और वहां से बड़े शहरों में इलाज के लिए चले जाते हैं। जिला अस्पताल के ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार के मुताबिक ओरल कैंसर की जांच में 95 फीसदी मरीजाें का पता चल जाता है। जिला अस्पताल में कीमोथेरेपी की सुविधा न होने के कारण मरीजों को बीआरडी मेडिकल काॅलेज भेज दिया जाता है। वायरल संक्रमण से भी मुंह का कैंसर होता है। मुंह के किसी हिस्से में बार-बार दांत लगने से होने वाले घांव से भी मुंह का कैंसर होता है।
मुंह के कैंसर के लक्षण
- जुबान का अल्सर जल्द ठीक न होना
- मुंह में लाल-सफेद रंग का छाला होना
- मुंह में जल्दी न भरने वाले घाव
- मसूड़े, जीभ और गालों के अंदर गांठ
सावधानियां व बचाव
शराब के सेवन से बचें।
तंबाकू के सेवन से बचें।
नियमित ब्रश कर मुंह साफ रखें।
दांतों में कैविटी न होने दें।
चिकित्सकों की जांच में हर माह ओरल कैंसर के तीन से पांच मरीज मिलते हैं। चिकित्सालय में कीमोथेरेपी आदि कैंसर के इलाज की सुविधा न होने के कारण इन मरीजों को बीआरडी मेंडिकल काॅलेज भेज दिया जाता है। समय-समय पर नेशनल ओरल प्रोग्राम भी चलाकर मुंह के कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है।
-डॉ. रामानुज कन्नौजिया, सीएमओ