अब किसानों को ऑनलाइन मिलेगा खसरा
संतकबीरनगर। खतौनी की तरह अब खसरा भी किसानों को ऑनलाइन मिलेगा। इसके लिए जमीनों के गाटा संख्या की फीडिंग कंप्यूटर में कराई जा रही है। उम्मीद है सितंबर माह से किसान जब चाहेंगे ऑनलाइन खसरा प्राप्त कर सकेंगे।
जनपद में तीन तहसीलें खलीलाबाद, मेंहदावल और धनघटा हैं। जिले में कुल 7,92,575 गाटा संख्या है। खलीलाबाद में 2,88,551, धनघटा में 2,95,359 और मेंहदावल में 2,08,665 गाटा संख्या है। शासन ने 1428 फसली से खसरा को ऑनलाइन कर दिया है। इसके लिए हर जिले में फीडिंग का कार्य हो रहा है। अब 1430 फसली से खसरा लेखपाल नहीं बनाएंगे। ऑनलाइन खसरा बनाया जाएगा।
1429 फसली का खसरा जब पूरा हो जाएगा तो वह कंप्यूटर में नहीं खुलेगा। 1430 फसली का खसरा ही खुलेगा। जुलाई माह में 1428 फसली का खसरा और अगस्त तक 1429 फसली का खसरा कंप्यूटर में फीड हो जाएगा। उसके बाद 1430 फसली का कार्य चलता रहेगा। वैसे खतौनी जमीन का अधिकार अभिलेख है। खतौनी हिंदी की वर्णमाल से तैयार की जाती है। जबकि खसरा गाटा संख्य से बनता है।
खसरे में खेतों की पड़ताल की जाती है की कौन सी फसल बोई गई है अथवा खेत खाली है। खतौनी कभी नष्ट नहीं की जाती है। वह अभिलेखागार में संरक्षित रहती है। जबकि खसरा 12 साल के बाद नष्ट कर दिया जाता है। दो साल का खसरा लेखपाल के पास रहता है। उसके बाद दस साल का खसरा अभिलेखागार में रखा जाता है।
...
कोट
खतौनी की तरह खसरा भी अब ऑनलाइन हो रहा है। जिले में 6,73,719 गाटा संख्या की फीडिंग कराई जा चुकी है। शेष की फीडिंग तीन दिनों में पूर्ण कर ली जाएगी। खसरा गाटा संख्या को दर्शित करता है कि किस किसान का किस गाटा संख्या में कितनी जमीन है। बैंक आदि से ऋण प्राप्त करने में भी किसान खसरा का प्रयोग करते हैं।
- मनोज कुमार सिंह, एडीएम