निजी दुकानदार 300 रुपये प्रति बोरी बेच रहे यूरिया
संवाद न्यूज एजेंसी
मेंहदावल। बारिश का फायदा उठा कर किसान धान की रोपाई तेजी से कर रहे है। जो लोग समय से धान की रोपाई कर दिए थे।उसमें यूरिया के छिडकाव की जरूरत है। ऐसे में यूरिया की मांग बढ़ गई है। साधन सहकारी समितियों पर यूरिया नहीं है। प्राइवेट दुकानदार अधिक कीमत वसूल रहे हैं।
मेंहदावल तहसील क्षेत्र के विकासखंड बेलहर कला, सांथा व मेंहदावल में धान की रोपाई बरसात में तेजी आते ही शुरू हो गई है। ऐसे में किसानों के बीच यूरिया खाद की मांग बढ़ गई है। लेकिन तहसील क्षेत्र में स्थित सभी साधन सहकारी समितियों पर यूरिया उपलब्ध नहीं है। सांथा के गनवरिया क्षेत्र में स्थित साधन सहकारी समिति पर अभी तक यूरिया नहीं पहुंची है। वहीं मेंहदावल के साधन सहकारी समिति भिटिया कला पर यूरिया नहीं है। जबकि साधन सहकारी समिति बिसौवा, गगनई राव आदि साधन सहकारी समिति पर यूरिया उपलब्ध है।
साधन सहकारी समिति पर इसका मूल्य सचिव 266 रुपये 50 पैसा किसानों से ले रहे हैं। वहीं प्राइवेट लाइसेंसी शक्तिमान का यूरिया 300 रुपये प्रति बोरी बेच रहे हैं। मेंहदावल विकासखंड क्षेत्र के पूर्वी ग्रामीण क्षेत्र में कई खाद के निजी दुकानदार खुलेआम शक्तिमान कंपनी की यूरिया 300 प्रति बोरी में बेच रहे हैं। मजबूर होकर किसान खरीदारी भी कर रहे हैं।
क्षेत्रीय किसान शंकर यादव,रामदीन, मुकुद, नंगा तिवारी, विशम्भरनाथ, राम अचल, संदीप सिंह, सतोष सिंह, रामहित, गौरीशंकर, आदि का कहना है कि इस क्षेत्र में स्थित साधन सहकारी समितियों पर यूरिया उपलब्ध नहीं है यदि आ भी गया तो इतनी लंबी किसानों की लाइन लगती है कि भीड़ की वजह से यूरिया कम पड़ जाता है। ऐसे में निजी खाद के लाइसेंसी दुकानदार से खाद लेना मजबूरी बन गई है। क्षेत्र के सभी दुकानदार निर्धारित मूल्य पर यूरिया बेचने की जगह 300 से लेकर 310 रुपये तक किसानों से वसूल रहे हैं।
पिछले साल जुलाई तक 7000 मीट्रिक टन यूरिया की खपत थी। जबकि वर्तमान में 13,000 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। यूरिया की कीमत प्रति बोरी 266 रुपये 50 पैसे है। जहां तक सवाल है साधन सहकारी समितियों पर यूरिया के उपलब्ध न होने का तो दो से तीन दिनों के भीतर समितियों पर यूरिया पहुंच जाएगी। यदि किसी किसान से तय मूल्य से अधिक प्राइवेट दुकानदार वसूल रहे हैं तो इसकी शिकायत करनी चाहिए। शिकायत पर जांच होगी और पकड़े जाने पर कार्रवाई भी हाेगी।
- पी सी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी