संतकबीरनगर। जिले में बने पंचायत भवनों में ताले लटक रहे हैं। जिससे लोगों को जरूरी कागजात बनवाने के लिए भटकना पड़ रहा है। संवाद टीम ने कुछ गांव की पड़ताल की तो वहां पर सचिवालय बंद मिले। ग्रामीणों ने बताया कि कागजातों को बनवाने के लिए उन्हें ब्लॉक या फिर शहर जाना पड़ रहा है। जिले के 736 ग्राम पंचायतों में कागजों में बखूबी सचिवालय संचालित हो रहे हैं।
इससे इतर ग्राम पंचायत सचिव भी कभी कभार ही सचिवालयों पर आते हैं। उनके जिम्मे कई ग्राम पंचायत का चार्ज होता है। ग्रामीणों को जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ ही पंचायत से जुड़े तमाम अन्य कार्य के लिए भटकना पड़ता है, जबकि पंचायतों को सक्रिय बनाने के लिए सभी स्थानों पर पंचायत सहायक की भी तैनाती हुई है। तमाम पंचायत सहायक सचिवालय पर आते ही नहीं है। यदि आए भी तो कुछ देर वहां पर रुकने के बाद गायब हो जाते हैं। इसके वजह से लोगों को कार्य के लिए भटकना पड़ता है।
विकास खंड मेंहदावल के ददरा गांव में पंचायत भवन पर ताला लटका हुआ मिला। ग्रामीणों के अनुसार किसी काम के लिए ब्लॉक पर जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर काम न हो पाने के वजह से आवश्यक प्रमाण पत्र समय से नहीं बन पाता है।
विकास खंड पौली के खेवसिया में भी पंचायत भवन बंद मिला। ग्रामीणों की मानें तो यहां पर भी जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन पाता है। इसके लिए कई दिन तक भटकना पड़ता है। पंचायत सहायक अथवा सेक्रेटरी काफी मुश्किल से मिलते हैं।
730 ग्राम पंचायतों में 53 स्थान पर पंचायत सहायक का पद रिक्त हैं। बाकी सभी ग्राम पंचायतों में आनलाइन हाजिरी होती है। अगर ऐसा है तो मामले की जांचकर कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश कुमार, डीपीआरओ