जंगली जानवरों से फसलों को बचाने की किसान कर रहे जद्दोजहद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोसया बाजार(संतकबीरनगर)। नीलगाय फसल के दुश्मन बन गए हैं। खेत में मचान पर किसानों का रतजगा भी काम नहीं आ रहा है। किसानों के झपकी लेते ही नीलगायों का झुंड फसल पर टूट पड़ता है। देखते ही देखते गढ़ाई कमाई को चट कर जा रहे हैं।
सरयू नदी के किनारे बांध और नदी की मुख्य धारा के बीच कृषि योग्य भूमि है, जहां पर खरीफ की फसल को उगाने के लिए किसानों को मशक्कत करनी पड़ती है। आमतौर पर धान की फसल सरयू नदी में आने वाली बाढ़ की चपेट में चढ़ जाती है। गेहूं, सरसों और सब्जियों की खेती से किसानों को उम्मीद रहती है।
क्षेत्र के रामपुर, पड़रिया, नकहा, तिलकूपुर, तेजपुर, नरायनपुर, भोतहा, हरिवंशपुर, खड़कपुर मांझा चहोड़ा, छपरामगर्बी, कुरमियान टोला समेत दर्जनों गांवों के किसान गेहूं की फसल को तैयार करते हैं। साथ ही परवल, खरबूज, तरबूज, ककड़ी, खीरे आदि की खेती कर परिवार का भरण पोषण करते हैं।
किसान राम पलट, हरिकिशुन,रामकुमार, उमाशंकर, गंगा प्रसाद, विंध्याचल, रामकोमल आदि का कहना है कि आमतौर पर धान की फसल सरयू नदी की बाढ़ की भेंट चढ़ जाती है। गेहूं की फसल पर ही भरोसा रहता है। इस बार नीलगाय समेत अन्य जंगली जानवर तेजी से फसल को चट कर रहे हैं। मजबूरी में दिन-रात खेती की रखवाली करनी पड़ रही है।