फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देश की आजादी में मुहिबुल्लाह ने निभाई थी भूमिका

विज्ञापन
सेमरियावां जूनियर हाईस्कूल में बना शहीद मुहिब्बुल्लाह गेट। - फोटो : KHALILABAD
विज्ञापन
देश की आजादी में मुहिबुल्लाह ने निभाई थी भूमिका
विज्ञापन

1922 में जेल में ही हो गई थी मौत, सेमरियावां गांव के निवासी थे मुहिब्बुल्लाह
सेमरियावां। देश को आजाद कराने के लिए सेमरियावां गांव निवासी शहीद मुहिब्बुलाह ने लड़ाई लड़ी। जिसकी चर्चा आज भी लोग करते हैं।
मौलाना फुजैल नदवी ने बताया कि उनके नाना के दादा शहीद मुहिब्बुलाह थे। देश की आजादी के लिए 1905 में इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारूल उलूम देवबंद के शेखुल दीस मौलाना महमूद उल हसन के नेतृत्व में तहरीक ए रेशमी रूमाल आंदोलन चलाया गया। रूमाल पर अंग्रेजों के खिलाफ गतिविधियों के प्लान गुप्त तरीके से संदेश लिखकर इधर-उधर भेजा जाता था। इस आंदोलन से परनाना शहीद मुहिब्बुल्लाह काफी प्रभावित हुए। सेमरियावां इलाके में भी जगह-जगह आंदोलन करने लगे। अंग्रेज आंदोलन से परेशान होने लगे। इस आंदोलन से जुड़े क्रांतिकारियों को जेल में डालने लगे। 1922 में सेमरियावां में आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर बस्ती जेल में डाल दिया गया। जेल में शहीद मुहिब्बुल्लाह ने कसम खाई कि जब तक फिरंगी देश छोड़ कर नहीं जाएंगे, तब तक अन्न पानी नहीं लेना है। जेल में रहकर अंग्रेजी शासन की यातनाएं सहते रहे और अपनी कसम पर कायम रहे। बिना अन्न खाए और पानी पीए जेल में रहे। इससे जेल में ही उनकी मौत हो गई। बस्ती जेल में रहकर अजान देकर नमाज पढ़ते, खुदा की इबादत करते। अंग्रेजी अफसरों को यह बात नागवार लगती, लेकिन शहीद मुहिब्बुल्लाह इबादत करते रहे। अफसर यातनाएं देते रहे।
विज्ञापन

गांव में मुहिब्बुल्लाह के नाम से कोई यादगार पहचान नहीं
सेमरियावां। मौलाना फुजैल नदवी ने बताया कि परनाना शहीद मुहिब्बुल्लाह के बलिदान को यादगार बनाने के लिए गांव में कोई पहचान नहीं बन सकी है। पूर्व सांसद स्वर्गीय भालचंद्र यादव ने जूनियर हाईस्कूल सेमरियावां पर एक गेट बनवाया है। उनका शहीद मुहिब्बुल्लाह के नाम से स्टेडियम बनाने का प्लान था, लेकिन पूरा नहीं हो पाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें