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मध्याह्न भेजन : तीन लीटर दूध और बच्चे 154

Thu, 16 Mar 2023 11:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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- सप्ताह में बुधवार को प्रति बच्चे को 100 मिली लीटर दूध देने का है नियम
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- बीएसए की जांच में समय से नहीं पहुंचीं प्रधानाध्यापक व अन्य शिक्षक
- बीएसए ने प्रधानाध्यापक समेत पांच शिक्षकों का एक दिन का रोका वेतन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। बीएसए ने बुधवार को प्राथमिक विद्यालय डीघा और पूर्व माध्यमिक विद्यालय कटबंध का निरीक्षण किया। यहां उपस्थित 154 बच्चों में वितरित करने के लिए सिर्फ तीन लीटर दूध मंगाया गया था। जबकि मध्याह्न भोजन में प्रति छात्र 100 मिली लीटर के हिसाब से साढ़े पंद्रह लीटर दूध चाहिए था। इस दौरान प्रधानाध्यापक समेत पांच शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। बाद में प्रधानाध्यापक समेत तीन शिक्षक पहुंच गए। बीएसए ने पांचों शिक्षकों का एक दिन का वेतन रोक दिया।
बीएसए अतुल कुमार तिवारी ने बताया कि स्कूल खुलने का समय 8:30 बजे निर्धारित है। डीघा प्राथमिक स्कूल में समय से प्रधानाध्यक रेनू कुमारी और शिक्षक इंद्रनील कौर, मीना यादव और शिक्षामित्र सीमा यादव व सुनीता नहीं पहुंची थीं। यहां बच्चे घूमते पाए गए। 9.05 बजे प्रार्थना हुुई। यहां कुल 230 बच्चे नामांकित है। 154 बच्चे उपस्थित पाए गए।
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सप्ताह में एक दिन बुधवार को बच्चों में दूध वितरित करने का नियम है। यहां सिर्फ तीन लीटर दूध की मंगाया गया था। प्रति बच्चे को 100 मिलीलीटर के हिसाब से दूध देना होता है। ऐसे में मानक के अनुसार साढ़े पंद्रह लीटर दूध होना चाहिए था। यहां रंगाई-पुताई, फर्नीचर आदि कार्य के लिए रकम का भुगतान कर दिया गया है, जबकि मौके पर काम होना नहीं पाया गया। प्राधानाधपक समेत सभी अनुपस्थित लोगों का एक दिन का वेतन रोक दिया गया। पूर्व माध्यमिक विद्यालय कटबंध का भी निरीक्षण किया गया। यहां भी व्यवस्था ठीक-ठाक नहीं पाई गई। संबंधित प्रधानाध्यापक को चेतावनी दी गई है।
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सीडीओ ने प्रधान को सड़क बनवाने के दिए निर्देश
सीडीओ संतकुमार ने बताया कि बीएसए अतुल कुमार तिवारी के साथ तहसील क्षेत्र खलीलाबाद के गुलरिहा प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया। यहां स्कूल तक जाने के लिए संपर्क मार्ग नहीं है। जिसकी वजह से बच्चों को आने-जाने में दिक्कत होती है। प्रधान को निर्देश दिया कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नहर की पटरी की सफाई कराए और स्कूल तक जाने के लिए करीब 100 मीटर दूरी तक मनरेगा से खडंजा लगवाए। लेखपाल को निर्देश दिया गया कि वह पैमाईश करके जमीन को चिन्हित कराएं।
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