संतकबीरनगर। सीडीओ ने मनरेगा योजना में की जा रही धांधली को रोकने के लिए जांच कराने का नया तरीका अख्तियार किया। सीडीओ मंगलवार को पांच जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ नाथनगर ब्लॉक पर गए। पांच ऐसे गांवों में कार्यों की जांच कराई, जहां ऑनलाइन सर्वाधिक संख्या में मजदूर लगाया जाना प्रदर्शित किया गया था। जांच में 51 कार्यों के सापेक्ष 1215 मजदूर लगाए जाने का जिक्र था, जबकि मौके पर 100 से भी कम मजदूर मिले।
मनरेगा में मजदूरी हड़पने के नए तरीके के अख्तियार किए जा रहे खेल की पोल खुल गई। इस मामले में दोषियों का उत्तरदायित्व तय करके कार्रवाई की जाएगी।
सीडीओ संत कुमार मंगलवार को डीसी मनरेगा प्रभात द्विवेदी, डीसी एनआरएलएम जीशान रिजवी, जिला दिव्यांगजन अधिकारी प्रियंका यादव, जिला प्रोबेसन अधिकारी डॉक्टर श्वेता त्रिपाठी, भूमि संरक्षण अधिकारी कृषि शशंका चौधरी के साथ नाथनगर ब्लॉक मुख्यालय पर पहुंचे। वहां मनरेगा सेल से जानकारी जुटाई कि ब्लॉक क्षेत्र के किन-किन गांवों में मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों में अधिक संख्या में मजदूर लगाए जाने प्रदर्शित हो रहे हैं।
सीडीओ ने जिला प्राेबेसन अधिकारी को जयरामपट्टी गांव में, जिला दिव्यांगजन अधिकारी को गौरा गांव में, डीसी एनआरएलएम को तरयापार गांव में, डीसी मनरेगा को लोइयाभार गांव और भूमि संरक्षण अधिकारी को मोलनापुर में जांच के लिए भेज दिया गया। सीडीओ ने बताया कि उपरोक्त गांवों में सबसे अधिक मजदूर लगे थे। इसीलिए स्थलीय सत्यापन कराया गया। इन पांच ग्राम पंचायतों में कुल 51 कार्यों के सापेक्ष 1215 मजदूर ऑनलाइन प्रदर्शित हो रहे थे, जबकि अधिकारियों के सत्यापन के समय मौके पर 100 से भी कम मजदूर कार्य करते पाए गए।
इस तरह मनरेगा में मजदूरों की मजदूरी में किए गए खेल की पोल खुई गई। इसके लिए दोषी बीडीओ, सचिव, प्रधान और रोजगार सेवक का दायित्व निर्धारित कर कार्रवाई की जाएगी।