महीप अध्यक्ष व चतुर शुक्ल बने सिविल बार के महामंत्री
-कृष्णचंद्र पांडेय वरिष्ठ उपाध्यक्ष व राजेश मिश्र कनिष्ठ उपाध्यक्ष चुने गए
संतकबीरनगर। सिविल बार एसोसिएशन का चुनाव बृहस्पतिवार को दीवानी न्यायालय परिसर में संपन्न हुआ। इसमें महीप बहादुर पाल अध्यक्ष व चतुर शुक्ल महामंत्री चुने गए। जबकि वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर कृृष्णचंद्र पांडेय व कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर राजेश मिश्र निर्वाचित हुए। चुनाव समिति के अध्यक्ष श्याम बिहारी लाल श्रीवास्तव ने बताया कि सिविल बार एसोसिएशन के चुनाव के लिए सुबह साढ़े आठ बजे से मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई और तीन बजे तक चली। इस दौरान कुल 266 मत पड़े। इसमें अध्यक्ष पद के प्रत्याशी महीप बहादुर को 136 व सुभाष चंद्र श्रीवास्तव को 128 मत प्राप्त हुए। दो मत अवैध पाए गए। इस प्रकार महीप बहादुर पाल अध्यक्ष निर्वाचित हुए। जबकि महामंत्री पद पर चतुर शुक्ल को 107 मत, अजय कुमार सिंह को 103, सुरेंद्र कुमार को 55 मत मिले।
इस प्रकार चतुरजी शुक्ल महामंत्री चुने गए। इसी तरह वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए कृष्ण चंद्र पांडेय को 147 व संजीव कुमार को 105 मत प्राप्त हुए। इसमें कृष्ण चंद्र पांडेय वरिष्ठ उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। जबकि कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर राजेश मिश्र को 157 मत प्राप्त हुए और उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कृष्ण कुमार श्रीवास्तव को 101 मत मिले। इसमें राजेश मिश्र कनिष्ठ उपाध्यक्ष चुने गए। साथ ही उपाध्यक्ष के दो पदों पर अनिल कुमार गौतम व संतोष राय तथा कोषाध्यक्ष पद पर अनिल कुमार दूबे, संयुक्त मंत्री प्रशासन राजेश मिश्रा, संयुक्त मंत्री प्रसार अवधेश कुमार पांडेय, संयुक्त मंत्री पुस्तकालय जितेंद्र कुमार निर्विरोध निर्वाचत घोषित किए गए। चुनाव को लेकर सुबह से दीवानी न्यायालय परिसर में गहमागहमी बनी रही। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए थे। विजयी प्रत्याशियों के समर्थकों में जहां उत्साह का माहौल रहा, वहीं चुनाव में मात खाए प्रत्याशी समर्थकों को निराशा हाथ लगी।
बोले अध्यक्ष और महामंत्री, अधिवक्ता चैंबर बनाने की करेंगे पहल
अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए महीप बहादुर पाल और महामंत्री चतुर शुक्ल ने कहा कि अधिवक्ता हितों के लिए सदैव खड़े रहेंगे। उनकी पहली प्राथमिकता होगी कि अधिवक्ताओं के लिए चैंबर बने, इसके लिए वे पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने जीत का श्रेय अधिवक्ता साथियों को दिया। वादा किया कि अधिवक्ता साथियों के विश्वास को कायम रखेंगे। अधिवक्ताओं के सुख-दुख में सदैव आगे रहेंगे।