कठिनइया नदी के किनारे बनी है लक्ष्मीदास की कुटिया
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरिहरपुर। नगर पंचायत हरिहरपुर में स्थित कठिनइया नदी के किनारे बनी संत लक्ष्मी दास की कुटिया के विकास का जिम्मा पर्यटन विभाग उठाएगा। इसके लिए शासन से पहली किस्त दो करोड़ रुपये विभाग को अवमुक्त कर दी गई है। इस कुटिया पर बने मंदिर को संतों ने अपना मकान बेचकर 1969 में बनवाया था।
हरिहरपुर के रहने वाले संत लक्ष्मी दास और हरिराम दास ने अपना मकान बेचकर इस मंदिर की नींव रखी थी। घर बेचने में मिले पैसे को इसी मंदिर के निर्माण में खपा दिया था। हरिहरपुर के राजघाट पुल के पास बने इस मंदिर में शिवलिंग और दुर्गा जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर के द्वार पर हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।
हरिहरपुर निवासी अनिमेश पांडेय ने बताया कि करीब 48 साल पहले यहां बाबा लक्ष्मी दास ने विष्णु महायज्ञ करवाया था। इसमें वृंदावन धाम के कलाकारों ने श्रीकृष्ण की रासलीला का मंचन किया था। इस यज्ञ में दूर-दराज से साधु-संत और अन्य लोग दान करने के लिए पहुंचे थे। इसी यज्ञ के बाद से इस मंदिर को ख्याति मिली।
लोगों का कहना है कि बाबा लक्ष्मी दास नगर पंचायत हरिहरपुर के ही रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी कुटिया पर मंदिर की स्थापना के साथ ही सिद्धेश्वरनाथ मंदिर का भी जीर्णोद्धार कराया था। शिक्षक समय देव पांडेय ने बताया कि मंदिर पर सवा महीने यज्ञ-हवन का कार्यक्रम चला था। उसके बाद करीब बारह वर्षों तक राम नाम का संकीर्तन चलता रहा। उन्होंने कहा कि मंदिर के विकास से नगर के लोगों की आस्था को नया आयाम मिलेगा।क्षेत्र में हठ योग के लिए प्रसिद्ध रहे बाबा लक्ष्मी दास लोगों के बीच लोकप्रिय संत थे।