भैया दूज पर्व के साथ हुई भगवान गोवर्धन की पूजा
बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर उतारी आरती
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। दीपावली के बाद बृहस्पतिवार को जिले में जगह-जगह गोवर्धन की पूजा की गई। महिलाओं और युवतियों ने गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाया और उसे चंदन आदि से टीका लगाकर पूजा पाठ किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान इंद्र ने बृजवासियों से नाराज होकर मूसलाधार बारिश की थी। उस वक्त भगवान श्रीकृष्ण ने छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर बृजवासियों को बचाया था। पर्वत के नीचे भगवान श्रीकृष्ण ने सभी को सुरक्षा प्रदान की थी, तभी से भगवान श्रीकृष्ण को गोवर्धन के रूप में पूजा जाता है।
खलीलाबाद के किशोर धर्मशाला परिसर में महिलाओं ने एकत्र होकर गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाया और उसे अच्छत, चंदन धूप, दीप से पूजा के बाद भोग चढ़ाया। इस अवसर पर अंशिका वर्मा, अंकिता, अर्पिता, नैना, माधुरी, अंशी, महक आदि लड़कियां व महिलाएं मौजूद रहीं। बखिरा कस्बे में महिलाओं ने समवेत रूप मेें गोवर्धन पूजा करते हुए गीत गाए और आरती के बाद प्रसाद वितरण किया।
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भाइयों ने बहनों को दिया उपहार
संतकबीरनगर। यमद्वितीया की तिथि में बृहस्पतिवार को अपनी बहनों के घर जाकर भाइयों ने नए चावल का बना फरा खाया। बहनों ने भाइयों को तिलक लगाया, आरती उतारी और उन्हें दीर्घायु के आशीष दिए। जबकि भाइयों ने उपहार दिए।
बताते हैं कि सूर्य की पत्नी छाया से यमराज और यमुना की उत्पत्ति हुई थी। जब भी बहन-भाई यम को अपने यहां आमंत्रित करती वे व्यस्तता के कारण आ नहीं पाते। एक बार यम पहुंचे तो बहन ने उनकी आरती उतारी। भोजन कराया और बदले में यम से यह वर मांग लिया कि जो इस दिन अपनी बहन के घर जाकर भोजन करे, उसे तुम्हारा भय न हो, यम ने एवमस्तु कहा। तबसे कार्तिक शुुक्ल द्वितीया को बहनों के घर जाकर भोजन करते हैं, बदले में उपहार देते हैं।