निगम की तरफ से नहीं है पर्याप्त सुरक्षा उपकरण के इंतजाम, सड़क पर हादसे का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिले में बिजली कर्मियों को रात के समय फाल्ट ठीक करके लिए सड़क पर सीढ़ी लगाकर पोल पर चढ़ना होता है। ऐसे में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होते हैं। ऊपर चढ़ा कर्मी और नीचे सीढी पकड़े कर्मी अंधेरे में फाल्ट दुरुस्त करते हैं। अगर कोई वाहन तेज रफ्तार आ जाए तो इनकी जान पर बन आएगी। निगम की तरफ से भी सुरक्षा उपकरण का कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं।
फाल्ट आने के बाद संविदा कर्मी उसे सही करते हैं। अक्सर कई बार बिजली बनाते समय दुर्घटना भी होती है। कई बार उपचार में मदद के लिए उन्हें साथियों का सहारा लेने के लिए विवश होना पड़ता है। निगम की तरफ से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं किए गए हैं, जिसका खामियाजा संविदा कर्मियों को उठाना पड़ता है। कई स्थानों पर बिजली के तार सड़क के ऊपर से गए हैं। फाल्ट आने के बाद संविदा कर्मी रात के समय अंधेरी सड़क के बीच में जान जोखिम में डालकर फाल्ट दुरुस्त करते हुए आपूर्ति बहाल करते हैं।
चार कर्मी पकड़ कर खड़े रहते हैं सीढ़ी
चार संविदा कर्मी सीढ़ी पकड़कर खड़े रहते हैं और एक संविदा कर्मी सीढ़ी के सहारे ऊपर चढ़कर फाल्ट अटेंड करता है, उन्हें यह भी नहीं पता होता है कि कौन वाहन किधर से आकर उन्हें निशाना बना सकती है। वहीं निगम अधिकारी भी संविदा कर्मियों के सुरक्षा उपकरण के मामले में भी उदासीन बने हुए हैं। जिसके वजह से संविदा कर्मी भारी असुरक्षा के बीच फाल्ट दुरुस्त करते हैं।
पुराने सुरक्षा उपकरण से चल रहे काम
खलीलाबाद और मेंहदावल दोनों डिवीजन में पुराने सुरक्षा उपकरण से संविदा कर्मी काम कर रहे हैं। सीढ़ी काफी पुरानी व जर्जर हो गई है। हाल ही में शहर के एनडी पांडेय गली में सीढ़ी से गिरकर संविदा कर्मी अमित गुप्ता घायल हो गया था। वहीं पिछले दिनों संविदा कर्मी बलराम भी करंट का झटका लगने से गिरकर घायल हो गया था। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी घटनाओं से सीख नहीं ले रहे हैं। हैंड गल्ब्स, हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, प्लायर, अर्थ चेन आदि अन्य सुरक्षा उपकरण भी कर्मियों को अपने पास लेकर काम चलाना पड़ रहा है।
मामला संज्ञान में आया है। प्रकरण काफी गंभीर है। इसके लिए सभी के साथ बैठक करके सुरक्षा उपकरण की समीक्षा की जाएगी। फाल्ट ठीक करने के दौरान संविदा कर्मियों के सुरक्षा में जो भी कमी मिलती है, उसे तत्काल दूर कराया जाएगा।
- रमेश सिंह, अधीक्षण अभियंता