गायों में फैल रहा लंपी स्किन डिजीज
- बीमारी से गोवंश को बचाव के लिए पशु बाजार आयोजित नहीं किए जाने के निर्देेश
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। गोवंश में लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप फैल रहा है। इसको लेकर पशुपालन विभाग पशु पालकों को सतर्कता बरतने का सुझाव दे रहा है। इधर शासन ने गोवंश के परिवहन पर रोक लगा दिया है। इसके साथ ही तत्काल प्रभाव से पशु बाजार नहीं लगाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
सीमावर्ती राज्य राजस्थान, हरियाणा के अलावा प्रदेश के अलीगढ़, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, आगरा, एवं बरेली मंडल के 15 जनपदों में लंपी स्किन डिजीज पशुओं में फैल रही है। इस रोग से प्रदेश में अब तक 15 जनपदों के 563 गांवों के 5,823 पशु प्रभावित हो चुके हैं।
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर ओपी मिश्रा ने बताया कि यह एक विषाणुजनित रोग है। खास कर गायों में फैलती है। यह बीमारी वायरस से होती है, जो 70 से 80 प्रतिशत गायों को प्रभावित करती है। पशु के पूरे शरीर में छोटी-छोटी गाठें हो जाती है। जिससे पशु चारा खाना छोड़ देते हैं। गाठें फूल जाती है और उसमें घाव हो जाता है। इससे 15 प्रतिशत मृत्यु दर रहती है।
प्रदेश सरकार ने इसके लिए सीमावर्ती राज्य राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड एवं मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश के रास्ते में पड़ने वाले समस्त चेकपोस्ट व पुलों पर निगरानी बढ़ाए जाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही गोवंश के प्रदेश में प्रवेश पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया है। प्रदेश के समस्त जनपदों में भी गोवंश के परिहवन पर प्रतिबंध लगाया है।
पशु मेले पर लगाया गया रोक
लंपी स्किन डिजीज को देखते हुए प्रदेश सरकार ने पशु मेले, पशु हॉट, पशुपैठ जहां पशुओं का क्रय-विक्रय होता है उस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया है। गोआश्रय स्थलों में कोई नया पशु संरक्षित न किए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए नगर निकाय, जिला पंचायत, ग्राम पंचायत, निजी अथवा स्वयं सेवी संस्थाओं के जरिए संचालित गो आश्रय स्थलों पर निर्देश जारी होगा। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि जिले के लिए 15,000 गोट पॉक्स टीके की मांग शासन से की गई है।
गोवंश में रोग के लक्षण
लंपी स्किन डिजीज एक विषाणु जनित चर्म रोग है। पशुओं को तेज बुखार, आंख- नाक से पानी गिरना, पैरो में सूजन, कठोर एवं चपटी गांठ से शरीर का ढक जाना, पशुओं में नेक्रोटिक घाव, श्वसन और जठरांत्र का होना, सांस लेने में कठिनाई, वजन घटना, शरीर कमजोर होना, गर्भपात अथवा दूध कम होना लक्षण है।
रोग प्रकोप के समय क्या करें
निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी को तत्काल सूचित करें।
प्रभावित पशुओं को स्वस्थ्य पशुओं से अलग रखे।
प्रभावित पशु का आवागमन प्रतिबंधित करें।
पशुओ को सदैव स्चच्छ पानी पिलाएं।
प्रभावित पशुओं के दूध को उबाल कर पीए।
मच्छरों, मक्खियों, किलनी आदि से बचाने के लिए कीटनाशक का उपयोग करें।
पशुबाड़े, गोशाला, पशु-खलिहान में फिनायल / सोडियम हाइपोक्लाइट का छिड़काव करें।
बीमार पशुओं की देखभाल करने वाले पशुपालक को अन्य पशुओं से दूर रखें।
रोग प्रकोप के समय क्या न करे
पशुओं को सार्वजनिक चारागाह के लिए न भेजे।
पशु मेला, पशु प्रदर्शनी में पशुओं को न भेजे।
पशु के शव को खुले में न फेंके, वैज्ञानिक विधि से दफनाएं।
बीमार एवं स्वस्थ पशुओं को एक साथ चारा-पानी न कराएं।
प्रभावित क्षेत्रों से पशु खरीद कर न लाएं।
रोगी पशु का दूध बछड़े को न पिलाएं।
यदि गोवंश में लंपी स्किन डिजीज बीमारी के लक्षण दिखे तो तत्काल पशु डॉक्टर से संपर्क करें। जिले में जहां-जहां पशु बाजार लगता है, उसे तत्काल प्रभाव से बंद कराए जाने के लिए डीएम के माध्यम से निर्देश पत्र जारी कराया जा रहा है।
- डॉक्टर संजय यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी