महुली स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय।संवाद
- फोटो : महुली स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय।संवाद
कही उधार के डॉक्टर तो कहीं फार्मासिस्ट के भरोसे लोगों की सेहत
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिहरपुर। आयुर्वेदिक चिकित्सालय हरिहरपुर और महुली को वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित करने की सरकारी मुहिम धराशायी होती दिख रही है। इन अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती न होने से लोगों को दिक्कत हो रही है। महुली आयुर्वेदिक अस्पताल में उधार के चिकित्सक की मौजूदगी सप्ताह में दो दिन के लिए रहती है। हरिहरपुर में फार्मासिस्ट के भरोसे लोगों की सेहत है।
हर शख्स को उसके आसपास बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार ने चिकित्सा इकाइयों को मजबूत करने की मुहिम चला रखी है। इसी क्रम मे आयुर्वेदिक अस्पतालोंं को नया आयाम देने का सिलसिला शुरू हुआ है। इनमें योग प्रशिक्षकों की तैनाती कर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में स्थापित करने की कोशिश हो रही है।
साथ ही पर्याप्त दवाएं भी अस्पतालों को मुहैया कराई जा रही हैंं, लेकिन अस्पतालों की दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। महुली स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में सप्ताह में दो दिन चिकित्सक मौजूद रहते हैं। यहॉ के प्रभारी चिकित्सक डॉ. गौरी दत्त मिश्रा ने बताया कि उनकी तैनाती गोरयाभार अस्पताल में है, लेकिन सप्ताह में दो दिन महुली अस्पताल में भी सेवा देते हैं। अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं बिजली व पानी नहीं है।
परिसर में लगा हैंडपंप से प्रदूषित पानी निकलता है। बिजली न होने से गर्मी के मौसम में कर्मचारियों को दिक्कत होती है। आयुर्वेदिक चिकित्सालय हरिहरपुर में डेढ़ साल से चिकित्सक नहीं हैं। यहॉ तैनात फार्मासिस्ट सुधीश चंद्र त्रिपाठी ही लोगों को दवा देते हैं। अस्पताल में शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं है। चिकित्सक डॉ. गौरी दत्त मिश्रा ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद से लोगों का रुझान आयुर्वेद की तरफ बढ़ा है। प्रतिदिन अस्पताल में गठिया, खॉसी, जुकाम, बुखार और सुगर सहित अन्य बीमारियों की दवा कराने लोग आ रहे हैं।