सेमरियावां। मनरेगा में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो गई हैं। शासन व प्रशासन भले ही मनरेगा के तहत ग्रामीणों को लाभ देने की बात कर रहा हो, लेकिन ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिव मनरेगा के कार्य में भ्रष्टाचार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सेमरियावां ब्लाॅक के उसराशहीद गांव में सामने आया है।
यहां के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव की दलित बस्ती में गड़ही खोदाई कार्य जेसीबी से कराया जा रहा है। इससे मनरेगा मजदूरों के हक पर डाका और सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके बावजूद अधिकारी इस पर कोई अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। उसराशहीद गांव के इरशाद अहमद का आरोप है कि ब्लॉक के ग्राम पंचायत उसराशहीद में दलित बस्ती में स्थित गड़ही खोदाई कार्य मनरेगा के तहत कराया जा रहा है।
आरोप है कि ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव मिलकर इस कार्य को दिन दहाड़े जेसीबी से करा रहे हैं, इस तरह से मनरेगा गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, और मनरेगा मजदूरों के हक पर डाका डाला जा रहा है। आरोप है कि गांव के विकास एवं मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने वाली योजना से मजदूरों को दूर रखा जा रहा है। ग्रामीणों ने वीडियो क्लिप बनाकर इसकी शिकायत बीडीओ से करते हुए जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी विनोद मणि त्रिपाठी ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। जांच कराई जाएगी। जेसीबी से कार्य होना पाया गया तो कार्य श्रमदान घोषित किया जाएगा। तीन साल इस प्रोजेक्ट पर कार्य नहीं कराया जा सकेगा। संबंधित सचिव से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और फिर कार्रवाई की जाएगी। मनरेगा कार्यों में धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।