संतकबीरनगर। जनपद के गावों में सिंचाई का जल उपलब्ध कराने वाले नलकूप विभाग का कार्यालय बदहाल अवस्था में है। यहां के कर्मचारियों का कहना है कि सामान्य दिनों जहां कार्यालय के अंदर बैठकर काम करने में डर लगता है। वहीं, बारिश के दिनों लगता है कि छत समेत दीवारें भी ढह जाएंगी। कार्यालय परिसर समेत आवासीय परिसर में भी जगह- जगह झाड़-झंखाड़ के साथ ही गंदगी भी है। यहां आने वाले लोग कार्यालय को देखकर चौंक जाते हैं कि यह ऑफिस है या कबाड़ घर।
शहर के बीचो- बीच करीब 5 से 6 एकड़ जमीन पर सरयू नहर काॅलोनी में नलकूप विभाग का कार्यालय समेत आवासीय परिसर स्थापित है। यहां एक्सईएन, दो एसडीओ समेत जिले में तैनात विभाग के 60 से 70 अधिकारी-कर्मचारी बैठते हैं। अव्यवस्था का आलम यह है कि अगर किसी ग्रामीण को यहां किसी काम से आना पड़े तो घंटे भर का समय केवल कार्यालय का पता ढूंढने में लगेगा। कहीं संकेतांक या शाइन बोर्ड नहीं लगा है। देहात तो छोड़िए, शहर में रहने वाले लोगों को भी नहीं पता है कि शहर के बीचों-बीच करीब पांच से छह एकड़ में नलकूप विभाग का कार्यालय और आवासीय परिसर बना है।
करीब 70 साल पहले बना नलकूप विभाग का कार्यालय आबादी बसने के बाद धीरे-धीरे मुख्य सड़क से लगभग डेढ़ सौ मीटर अंदर हो गया है। कार्यालय का पता खोजने के लिए लोग परेशान होते हैं। जिम्मेदारों की उदासीनता है कि जिले के प्रमुख विभागों में मौजूद नलकूप विभाग के कार्यालय का पता बताने के लिए शहर में एक भी सांकेतक नहीं लगा है। करीब यहां काम करने वाले कर्मचारियों के साथ ही यहां काम कराने आने वाले लोगों को भी भय के माहौल में रोजाना इस जर्जर भवन में आने की मजबूरन आना पड़ता है। यहां की दीवारों में जहां सीमेंट की जगह केवल अब राख ही बची है, वहीं, छतों में पड़ी दरारें से हर समय अनहोनी की आशंका रहती है। बारिश की रफ्तार यदि तेज हो जाए तो छत चूने के साथ ही ढह जाने का डर बना रहता है। कार्यालय और आवासीय परिसर दोनों में हर जगह झाड़ियां उग आई हैं। कूड़े और गंदगी से रहना दूभर हो जाता है। इस माहौल में एक ओर जहां सांप, बिच्छू जैसे खतरनाक जीवों का खतरा बना रहता है तो वहीं दूसरी ओर शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप इस कदर बढ़ जाता है कि बिना मच्छरदानी लगाए बैठना भी मुश्किल हो जाता है।
नलकूप में लग रहा जंग, चारों ओर उगी हैं झाड़ियां
कार्यालय परिसर में मौजूद एकमात्र नलकूप को चलाए न जाने की वजह से जंग लग रहा है। नलकूप के कमरे के दरवाजों को खुले हुए वर्षों हो चुके हैं। कमरे की चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं। जब कार्यालय परिसर में मौजूद नलकूप का यह हाल है तो जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित नलकूपों का हाल क्या होगा, यह समझा जा सकता है।
कार्यालय भवन और आवासीय परिसर की मरमम्त के लिए कार्ययोजना बना कर उच्चाधिकारियों समेत मुख्यालय को अवगत करा दिया गया है। बजट मिलते ही काम शुरु करा दिया जाएगा, परिसर और नलकूप के पास मौजूद झाड़ियों को साफ करने के लिए संबंधित कर्मचारी को निर्देश दिया गया है।
- लालचंद्र, एक्सईएन, नलकूप विभाग