- मेडिकल जांच में देरी से पीड़िता परेशान होती हैं
-पुलिस को आरोप पत्र दाखिल करने में विलंब होता है
- एक प्रकरण में दुष्कर्म पीड़िता का 26 दिन बाद भी तय नहीं हो पाया उम्र
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। महिला संबंधी अपराधों में त्वरित कार्रवाई और आरोपियों को सजा दिलाए जाने को लेकर शासन बेहद गंभीर है। दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल जांच दो दिन में पूरी कर लेने का नियम हैं लेकिन जिला अस्पताल में जांच में महीने लग जा रहे हैं। इससे पीड़िता जहां परेशान हो रही हैं वहीं पुलिस समय से आरोप पत्र को कोर्ट में प्रेषित नहीं कर पा रहे हैं। इतना ही नहीं एक मामले में दुष्कर्म पीड़िता की आयु घटना के 29 दिन बाद भी तय नहीं हो पाई। जिला अस्पताल तो दूर मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ने भी रेडियोलाजिस्ट नहीं होने का हवाला देकर जांच करने से हाथ खड़े कर लिए।
इधर दुष्कर्म पीडिता को रानी लक्ष्मी बाई महिला सम्मान कोष से मिलने वाली सहायता राशि भी नहीं मिल पाई है। इसमें नियम है कि केस दर्ज होने के बाद एक लाख रुपये और आरोप पत्र प्रेषित होने के बाद दो लाख की सहायता मिलनी चाहिए। वैसे सीडीओ ने पहल करके जिला प्राेवेशन विभाग के पोर्टल पर दुष्कर्म पीडिता का आवेदन कराते हुए सहायता राशि दिलाने की पहल शुरु कर दी है। संवाद
केस - एक
कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली दिव्यांग किशोरी के साथ 29 जून को गांव के ही आरोपी युवक ने दुष्कर्म किया था। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया। आलम यह है कि किशोरी को पुलिस मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल ले गई लेकिन किशोरी की आयु गठित डॉक्टर के पैनल ने तय नहीं कर पाया। पुलिस ने पहल की तो सीएमओ ने जांच के लिए मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भेजा जहां मेडिकल कालेज गोरखपुर ने यह कहते हुए जांच कर आयु तय करने से मना कर दिया कि वहां रेडियोलाॅजिस्ट की तैनाती नहीं है। घटना हुए 26 दिन गुजर गए और किशोरी की आयु तय नहीं हो पाई। जिसकी वजह से पुलिस आरोप पत्र प्रेषित नहीं कर पा रही है।
केस- दो
कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली 16 साल की किशोरी से 22 जून को आरोपी दुष्कर्म किया था। दुष्कर्म पीड़िता की जांच 20 जुलाई को पूर्ण हो पाई।
केस- तीन
कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली एक युवती के साथ शादी का झांसा देकर आरोपी ने दुष्कर्म किया। 25 फरवरी को पुलिस ने केस दर्ज किया था। पीड़िता का मेडिकल जांच 21 मार्च को पूरा हुआ।
महिला संबंधी अपराधों को लेकर पुलिस बेहद संजीदा है। खासकर दुष्कर्म की घटना में पुलिस त्वरित कार्रवाई करती है। यह सच है कि मेडिकल जांच में देरी होने से आरोप पत्र प्रेषित करने में पुलिस को वक्त लग जाता है। मेडिकल तय समय सीमा में पूर्ण हो,इसके लिए सीएमओ से पत्राचार करेंगे।
- सत्यजीत गुप्ता,एसपी
दुष्कर्म पीड़िताओ की मेडिकल जांच में कोई सुस्ती नहीं बरती जाती है। पहले महिला चिकित्सक पीड़िता की शारीरिक परीक्षण करती है। आंतरिक और बाह्य चोटोंं का परीक्षण फिर एक्स-रे होता है। जिससे उम्र तय की जाती है। उसके बाद जेनरेटिक जांच के लिए गोरखपुर प्रयोगशाला भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद सपलीमेंटी तैयार कर रिपोर्ट पुलिस को दी जाती है। केस अधिक होने की वजह से गोरखपुर प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने में देरी होती है तो उसमें क्या किया जा सकता है। जहां तक महिला चिकित्सक के क्रम आने पर देरी होने का सवाल है तो इसके लिए यह व्यवस्था बनाई गई है कि जैसे ही गोरखपुर से जेनरेटिक रिपोर्ट आएं वैसे ही विवेचक संबंधित महिला चिकित्सक से संपर्क कर सपलीमेंटी रिपोर्ट तैयार कराएं। जहां तक एक दुष्कर्म पीड़िता के आयु तय नहीं हो पाने का सवाल है, तो यह अलग केस है। दुष्कर्म पीड़िता का हारमोनल, बौद्विक, शारीरिक आदि का विकास नहीं हुआ है। हड्डी,दांत, एक्स रे आदि से उम्र तय नहीं हो पा रही है। अब इस प्रकरण को केजीएयू लखनऊ भेजा जाएगा।
- डॉक्टर अनिरुद्ध सिंह,सीएमओ
दुष्कर्म पीड़िता के आयु से रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष के लाभ मिलने में कोई रुकावट नहीं है। यह सच है कि सम्मान राशि की पहली किस्त मिलने में देरी हुई है,लेकिन प्रकरण जैसे ही संज्ञान में आया ,वैसे ही जिला प्रोवशन अधिकारी को बुलाकर पीड़िता का आवेदन पोर्टल पर करा दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही पीड़िता को पहली किस्त एक लाख रुपये की धनराशि दिला दी जाएगी। अलगी किस्त आरोप पत्र प्रेषित होते ही दिलाई जाएगी।
- संतकुमार,सीडीओ