संतकबीरनगर। जिले में किसानों की मुसीबतें कम नहीं हो रही है। कभी बाढ़ तो कभी सूखा की मार किसानों को झेलनी पड़ती है। इधर साधन सहकारी समितियां भी किसानों को दर्द देने लगी हैं। कारण यह है कि अधिकतर समितियां बदहाल है। जिसके कारण किसानों को खाद-बीज के लिए भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है।
जिले में किसानों की सहूलियत के लिए 76 साधन सहकारी समितियां हैं। इन समितियों के जरिए किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन स्थिति यह है कि इन समितियों में से मात्र 50 ही सक्रिय हैं। वर्तमान में कई साधन सहकारी समितियां बदहाल हैं तो कहीं समितियों पर ताला लटका हुआ है। कई समितियों पर झांड़- झंखाड़ उग आए हैं। जिसके कारण वहां कोई आता-जाता ही नहीं है। खलीलाबाद ब्लॉक के चकदही साधन सहकारी समिति पर कई महीनों से ताला लगा है, जहां झांड झंखाड उग आए हैं। ऐसी ही स्थिति धनघटा क्षेत्र के साधन सहकारी समिति बंडा बाजार, शिवापार, धनघटा, हैंसर बाजार, अंजाव, पौली, रजनौली, अशरफपुर, जिगिना, संठी, सिरसी, खाजो आदि की भी है। इन बदहाल समितियों के चलते किसानों को भारी परेेशानी उठानी पड़ रही है। यही नहीं साधन सहकारी समितियों पर सचिवों की कमी भी बनी हुई है। एक-एक सचिव पर दो से तीन समितियों की जिम्मेदारी है। जिससे सचिव एक साधन सहकारी समिति पर आते हैं तो दूसरी समिति पर ताला लटका रहता है।
उधर, जो किसान समितियों पर पहुंचते हैं, उन्हें परेशानी झेलनी पड़ती है। किसान दशरथ यादव, रामफल आदि ने कहा कि वर्तमान में धान की बेहन डाली गई है, इसके लिए खाद की जरूरत है। साथ ही बुआई के लिए धान के बीज की भी आवश्यकता है, लेकिन समितियों पर ताला लगे होने से निराश होकर लौटना पड़ता है। मजबूरी में मार्केट से खाद खरीदनी पड़ रही है।
जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा ने कहा कि खाद व बीज की कमी नहीं है, जो समितियां सक्रिय हैं वहां खाद-बीज उपलब्ध है। सचिवों की कमी के कारण कुछ दिक्कत आ रही है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।