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Sant Kabir Nagar News: औद्योगिक क्षेत्र का हाल

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संतकबीरनगर जिले के औघोगिक क्षेत्र में बंद पड़ी फैक्ट्री। - फोटो : KHALILABAD
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दम तोड़ रहे उद्योगों को इंवेस्टर्स समिट से संजीवनी मिलने की उम्मीद
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संतकबीरनगर। 48 साल पहले स्थापित खलीलाबाद का औद्योगिक क्षेत्र दम तोड़ रहा है। अलग जिला बनने के बावजूद एक-एक करके औद्योगिक इकाइयां बंद होती जा रही हैं। अब तक करीब 121 इकाइयां बंद हो चुकी हैं। इससे क्षेत्र का विकास अवरुद्ध हो रहा है और लोगों को बेरोजगार होना पड़ रहा है। अब प्रस्तावित जनपद स्तरीय इंवेस्टर समिट के आयोजित किए जाने से नए उद्योगों के स्थापित होने की उम्मीद जग गई है। इससे दम तोड़ रहे औद्योगिक क्षेत्र को संजीवनी मिलने का पूरा भरोसा है।
वर्ष 1973-74 में खलीलाबाद में उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निगम की स्थापना हुई थी। राष्ट्रीय राज्यमार्ग -28 के किनारे औद्योगिक क्षेत्र स्थित है। करीब 231.34 एकड़ में फैले औद्योगिक क्षेत्र में 272 औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। इसमें 353 भूखंड हैं। उद्यमी नितिन जालान, माखन लाल अग्रवाल, घनश्याम दास अग्रवाल बताते हैं कि पूंजी की कमी, उत्पादों को बाजार नहीं मिल पाने, वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की वजह से एक-एक करके औद्योगिक इकाइयां बंद होती जा रही हैं। जबकि 151 इकाइयां संचालित हो रही हैं जिसमें करीब 3,500 लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
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उ.प्र.राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के क्षेत्रीय प्रबंधक सुभाष चंद्र पांडेय ने बताया कि वर्तमान में खलीलाबाद औद्योगिक क्षेत्र में 151 औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। जबकि 121 इकाइयां बंद हो चुकी हैं। इकाइयों के पुनर्जीवित के लिए सरकार की ओर से योजनाएं संचालित हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं चल रही हैं। इसमें बैंकों से वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करके बंद इकाइयों को पुनर्जीवित करने की ओर उद्यमियों को ध्यान देना चाहिए। औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 23 जनवरी को इंवेस्टर समिट होने जा रहा है। इसमें औद्योगिक विकास प्राधिकरण के प्रयास से अब तक आठ उद्यमियों ने 131. 50 करोड़ के पूंजी निवेश की सहमति जताई है।
डालडा फैक्ट्री, रोलिंग मिल जैसी इकाइयां हुईं बंद
उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद पाठक ने बताया कि बंद होने वाली बड़ी औद्योगिक इकाइयों में ओसवाल की डालडा फैक्ट्री, रोलिंग मिल, पॉवरलूम आदि शामिल हैं। खलीलाबाद की चीनी मिल भी बंद हो गई। इकाइयों के बंद होने के पीछे पूंजी की कमी तो प्रमुख कारण है। साथ में पिछले सरकारों की नीतियां भी कम जिम्मेदार नहीं है। बिजली की कमी भी इसमें कारण बनी है। उन्होंने बताया कि 23 जनवरी को औद्योगिक क्षेत्र में होने जा रहा जनपद स्तरीय इंवेस्टर समिट से औद्योगिक क्षेत्र में निवेश का वातावरण पैदा होगा। यहां नए उद्योग स्थापित होने की उम्मीद है। इससे यहां रौनक बढे़गी और अधिक से अधिक रोजगार का सृजन होगा।
ये इकाइयां हो रहीं संचालित
जिला उद्योग के उपायुक्त राजकुमार शर्मा बताते हैं कि औद्योगिक क्षेत्र में मौजूदा समय में फ्लोर मिल, राइस मिल, फूड प्रोडक्ट, बिस्किट फैक्ट्री, पशु आहार, पेपर मिल, रेडीमेड गारमेंटस, धागा फैक्ट्री, कैमिकल फैक्ट्री, फर्नीचर फैक्ट्री, बायो फर्टिलाइजर, मुर्गीदाना बनाने की फैक्ट्री संचालित हो रही है। बंद इकाइयों को पुनर्जीवित करने और नए उद्योगों को स्थापित कराए जाने की दिशा में प्रयास जारी है। इसी कड़ी में 23 जनवरी को इंवेस्टर समिट का आयोजन हो रहा है जिसमें अब तक करीब 1,000 करोड़ से अधिक के पूंजी निवेश की सहमति बन चुकी है। यहां करीब 100 से अधिक नए उद्योग स्थापित होने की पूरी उम्मीद है। ऐसा होने पर करीब 15,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।
बंद इकाइयों को चालू कराने और अधिक से अधिक नई इकाइयों को स्थापित करने की दिशा में प्रयास जारी है। इसके लिए औद्योगिक मंत्री से पत्राचार कर चुके हैं। जनपद स्तरीय इन्वेस्टर्स समिट से भी यहां नए उद्योग स्थापित होने की उम्मीद जग गई है।
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-प्रवीण निषाद, सांसद
औद्योगिक क्षेत्र में बंद उद्योगों को चालू कराने और नए उद्योगों को स्थापित कराने का पूरा प्रयास है। औद्योगिक क्षेत्र में
सड़क, जल निकासी, पार्क सुंदरीकरण, बिजली आदि की सुविधाएं दुरुस्त किए जाने के लिए 30 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। नए उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। जनपद स्तरीय इन्वेस्टर्स समिट के जरिए अधिक से अधिक नए उद्यम लगाए जाने की दिशा में पूरी कोशिश है।
--- प्रेम रंजन सिंह, डीएम
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