अधूरी परियोजनाओं को बजट का इंतजार
दो साल पहले पूरे होने थे कुछ विकास कार्य
कहीं छह महीने तो कहीं साल भर से ठप है कार्य
संतकबीरनगर। बजट के अभाव में विकास की गति थम गई है। कई परियोजनाओं पर काम बंद है। हालांकि कुछ परियोजनाओं के लिए बजट भरपूर है।
प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2018 में जिले के करमाखान, दानोकुईया, करही, धर्मसिंहवा और सालेहपुर में पाइप पेजयल परियोजना की मंजूरी मिली थी। इस परियोजना की लागत 1262.27 लाख रुपये थी। शासन ने कार्यदायी संस्था यूपी सिडको को कार्य कराने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके लिए 631.35 लाख रुपये अवमुक्त भी किए। वर्ष 2020 में यह परियोजना पूरी होनी थी, लेकिन बजट की कमी से अधूरी पड़ी है।
करमाखान में राजकीय इंटर कॉलेज वर्ष 2017 में स्वीकृत हुआ था। वर्ष 2019 में ही कार्य पूर्ण हो जाना था। 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के बाद भी अधूरा है। काटा मानसिंह में आईटीआई का कार्य भी बजट के अभाव में अधूरा है। वर्ष 2019-20 में परसा माफी और मुसहरा में राजकीय इंटर कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन बजट की कमी से पूरा नहीं हो पाया।
वर्ष 2017 में सेमरियावां में राजकीय आईटीआई का निर्माण शुरू हुआ। इसका निर्माण कार्य 2020 में पूरा होना था, लेकिन बजट की कमी से कार्य पूरा नहीं हो पाया। परसा माफी में सद्भाव मंडप बन रहा है। बजट नहीं मिलने से काम रुका है। खलीलाबाद में राजकीय पुस्तकालय का निर्माण भी बजट की कमी से अधूरा है। समय माता मंदिर पोखरे का निर्माण कार्य शुरू हुआ है।
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इन परियोजनाओं के लिए बजट आवंटित
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रवीण मिश्रा ने बताया कि राजकीय महिला डिग्री कॉलेज पटनाखास के लिए 282.60 लाख रुपये, नर्सिंग कॉलेज चिलवनखोर के 27.58 लाख रुपये, बघौली और सेमरियावां में कामन सर्विस सेंटर के लिए 13. 07 -13 .07 लाख रुपये, राजकीय इंटर कॉलेज लोहसन के लिए 69 लाख रुपये आवंटित हुए हैं। राजकीय कॉलेज गोपालपुर के लिए भी बजट आवंटित हुआ है। जल्द ही इन जगहों पर कार्य की गति बढ़वाई जाएगी। जिन परियोजनाएं पर काम बंद है, वहां के लिए बजट की मांग की गई है।
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कोट
अधूरी परियोजनाओं के लिए शासन से बजट की मांग की गई है। उम्मीद है जल्द शासन से बजट मिल जाएगा। इसके बाद कार्यदायी संस्थाओं से कार्य तेजी से कराया जाएगा।
-प्रेम रंजन सिंह, डीएम