शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। फर्जी पते से पासपोर्ट बनवाने वाला गोरखपुर का आरोपी हाईस्कूल के अंक पत्र के पते से पकड़ा गया। उसे रोजगार के सिलसिले में बैंकाक जाना था। इसी लिए बिचौलिए वीरेंद्र यादव के सहारे रकम देकर पासपोर्ट हासिल किया। अभी बैंकाक जाने की फिराक में ही था कि पुलिस की गिरफ्त में फंस गया।
एसपी सत्यजीत गुप्ता ने पासपोर्ट सत्यापन में गड़बडी की शिकायत पर सीओ सदर अंशुमान मिश्रा से प्रारंभिक जांच कराई थी। सीओ की जांच में पाया गया कि वर्ष 2021-22 में कुल 101 पासपोर्ट के सत्यापन में हेराफेरी की गई। थानों से पासपोर्ट के जो आवेदन संस्तुति नहीं किए जाते थे,उन्हें पासपोर्ट सेल में तैनात दरोगा कामेश्वर मिश्रा और एलआईयू के मुख्य आरक्षी मनोज पटेल जनदीय आईडी पासवर्ड से संस्तुति करके भेज देते रहे। इसमें बाहरी व्यक्ति बिधियानी निवासी वीरेंद्र यादव से सहयोग लेते थे। इसके एवज में रकम ली जाती थी। इधर जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है,वैसे-वैसे तथ्य छुपाकर पासपोर्ट बनवाने वाले चेहरे सामने आ रहे है। फर्जी तरीके से तथ्य छुपाकर पासपोर्ट बनवाने के मामले में सात सितंबर को पुलिस ने दुधारा क्षेत्र के जातेडीहा गांव निवासी आरोपी अब्दुल सलाम और गोरखपुर जिले के गोला क्षेत्र के सकरदेइया निवासी गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अरविंद यादव उर्फ अमन यादव को पकड़ कर जेल भेजा था। इधर शनिवार को गोरखपुर जिले के बड़हलगंज क्षेत्र के मटिहानी निवासी अनिरुद्घ यादव को गिरफ्तार किया। एसपी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि पूछताछ में पकड़े गए आरोपी अनिरुद्घ यादव ने बताया कि वह 12 वीं पास है। उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है। वह तीन भाईयों में सबसे छोटा है।
वह पहले शराब की दुकान पर रहता था। उसके खिलाफ बड़हलगंज थाने में मारपीट और एससीएसटी एक्ट के तहत केस दर्ज था। उसे नौकरी के लिए बैंकाक जाना था,लेकिन मुकदमा दर्ज होने से गोरखपुर में पासपोर्ट नहीं बन पा रहा था। खलीलाबाद के बिधियानी निवासी बिचौलिए वीरेंद्र यादव से संपर्क किया तो उसने पासपोर्ट बनवाने का भरोसा दिया। इसके एवज में उसने बिचौलिए वीरेंद्र यादव को 20,000 रुपये दिया था,जब 5,000 रूयये बकाया था। उससे चूक हुई कि बिचौलिए वीरेंद्र यादव को वर्ष 2012 में उत्तीर्ण हाईस्कूल का अपना अंक पत्र दे दिया। जबकि आधार कार्ड उसने फर्जी बनवाया। जिसमें कोतवाली क्षेत्र के भिटवा टोले का पता दर्शा गया। भिटवा टोले के पते से ही उसका पासपोर्ट बन गया। बैंकाक जाने के लिए बीजा बनवाने की प्रक्रिया शुरु कर दिया था।
इधर पुलिस ने जांच पड़ताल किया। आरोपी गोरखपुर के गोला क्षेत्र के एक इंटर कॉलेज से हाईस्कूल उत्तीर्ण किया था। उसमें सही पता अंकित था। उसी के जरिए पुलिस टीम आरोपी का पता हासिल की और बाद में उसे पकड़ लिया। एसपी ने बताया कि अभी जांच चल रही है। तथ्य छुपाकर फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाने वाले पुलिस से बच नहीं पाएंगे। संवाद
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फर्जी पासपोर्ट मामले में अब तक पांच आरोपी जा चुके है जेल
फर्जी पासपोर्ट प्रकरण में सबसे पहले एलआईयू शाखा में तैनात मुख्य आरक्षी मनोज पटेल और बिचौलिया वीरेंद्र यादव सात मार्च को जेल भेजा गया था। जबकि तथ्य छुपाकर फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाने के मामले में सात अप्रैल को गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र संघ का पूर्व अध्यक्ष अरविंद यादव उर्फ अमन यादव और दुधारा क्षेत्र के जातेडीहा गांव निवासी आरोपी अब्दुल सलाम जेल भेजा गया था। शनिवार को पुलिस गोरखपुर के बड़हलगंज क्षेत्र के मटिहानी निवासी अनिरुद्घ यादव को जेल भेज दी,लेकिन इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी दरोगा कामेश्वर मिश्रा अभी तक पुलिस की पकड़ से दूर है। इसको लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठना लाजमी है। एसपी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि आरोपी दरोगा के खिलाफ 82 सीआरपीसी की कार्रवाई की जा चुकी है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगी हुई है। आरोपी दरोगा के खिलाफ कुर्की की भी कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।