धनघटा। चार साल पहले अंबेडकरनगर और आजमगढ़ की सीमा में बहने वाली घाघरा नदी अब संतकबीरनगर जिले की सीमा में तेजी के साथ प्रवाहित हो रही है। नदी की कटान और बाढ़ का खतरा रोकने के लिए शासन बिडहर घाट पुल के पूरब में नदी की धारा को दक्षिण दिशा में मोड़ने के लिए नदी की खोदाई करा रहा। इससे उलट पुल के पश्चिम पोकलैंड और जेसीबी से बालू का खनन करके छपरा मगर्वी गांव के करीब एमबीडी बांध की तरफ नदी की राह आसान की जा रही है। इस खनन को लेकर वर्ष 2017 में गांव के लोगों और पुलिस वालों में खूनी संघर्ष भी हुआ था, लेकिन खनन के जिम्मेदार बाज नहीं आ रहे हैं।
वर्ष 2017 में छपरा मगर्वी के सिवान में बालू खनन का पट्टा किए जाने की जानकारी गांव के लोगों को हुई, तो वह यह कहते हुए विरोध करने लगे कि बालू खनन से नदी की धारा गांव की तरफ मुड़कर एमबीडी बांध पर खतरा कर सकती है। इस कारण बालू खनन करना उचित नहीं है। इसके बावजूद जब बालू खनन के ठेकेदार प्रशासनिक अधिकारियों के साथ खनन कराने पहुंचे तो गांव के लोगों ने कड़ा विरोध किया। पुलिस और जनता के बीच हुए संघर्ष में तत्कालिक थानाध्यक्ष समेत कई लोग घायल हो गए। पुलिस ने सौ नामजद और 200 अज्ञात लोगों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया।
यह मामला आज भी न्यायालय में विचाराधीन है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि देवेंद्र यादव, राम सजीवन, रघुवर, रामप्रसाद, जय राम, रामदीन आदि का कहना है कि जिस आशंका के साथ बालू खनन का कार्य रोका जा रहा था। वह शक अब सच साबित हो रहा है। बालू खनन करने का पट्टा जिस जमीन पर हुआ है, वहां खनन न कराकर ठेकेदार नदी के किनारे पानी में पोकलैंड मशीन और जेसीबी से बालू निकलवा रहे हैं, जिससे नदी की धारा गांव की तरफ बढ़ती चली आ रही है। गांव वालों का कहना है कि इतना ही नहीं इस समय ठेकेदार मनमाने ढंग से खनन करा कर पर्यावरण को क्षति पहुंचा रहे हैं।
पोकलैंड मशीन से की जा रही खोदाई के कारण नदी की गहराई उत्तर की दिशा में काफी हो रही है, जिससे नदी की धारा तेजी के साथ उत्तर की दिशा में मुड़ने की संभावना प्रबल है। गांव वालों का कहना है कि गांव के लोगों को जब अपनी जमीन की पैमाइश कराने की जरूरत पड़ती है, तो राजस्व विभाग के लोग अभिलेख न होने के कारण पैमाइश करने से इंकार कर देते हैं और पता नहीं किस अभिलेख के आधार पर छपरा मगर्वी में बालू खनन का पट्टा किया गया। ठेकेदार मनचाहे तरीके से खनन किए जाने के नियमों को दरकिनार कर बालू का खनन करा रहे हैं। इतना ही नहीं घाघरा नदी के किनारे अवैध रूप से भी बालू खनन किया जा रहा है, लेकिन खनन विभाग और प्रशासन के लोग खामोश है।
इस संबंध में सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नदी के किनारे किए जा रहे मशीनों से बालू खनन खतरा बनता जा रहा है। नदी की धारा को मोड़ने के लिए सरकार जहां दो करोड़ से अधिक रुपये खर्च कर चुकी। वही बालू खनन कराने वाले नदी की धारा को उत्तर की दिशा में बढ़ने का दावत दे रहे हैं। जिससे बांध समेत नदी की तलहटी में बसे गांवों को खतरा बढ़ता जा रहा है।
-
बालू खनन का पट्टा जिस स्थान पर हुआ है, उसी स्थान पर खनन कराने का अधिकार ठेकेदार को है। अगर कहीं अंयत्र स्थान पर बालू खनन कराया जा रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। कुछ भी हो, लेकिन संतकबीरनगर जिले की सीमा में घाघरा नदी प्रवेश करके कटान और बाढ़ से दो वर्षों से तबाही मचा रही है। कभी गायघाट दक्षिणी गांव कटान की चपेट में आकर कटता है तो कभी तुरकौलिया नायक गांव के पास एमबीडी बांध को नदी अपने निशाने पर ले लेती है।
-डॉ रविंद्र कुमार,एसडीएम धनघटा