- स्वैच्छिक रक्तदाता कार्ड पर जरूरत पड़ने पर प्रदेश के किसी भी राजकीय ब्लड बैंक से ले सकेंगे खून
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। आपातकाल में जरूरत पड़ने पर अब डोनरों को कहीं भी भटकना नहीं पड़ेगा। जरूरत पड़ने पर स्वैच्छिक रक्तदाता कार्ड के जरिए प्रदेश के किसी भी राजकीय ब्लड बैंक से खून ले सकेंगे। राज्य रक्त संचरण परिषद के निदेशक डॉ हीरालाल ने ब्लड बैंक प्रभारियों को नए नियम के बारे में पत्र भेजकर जानकारी दी है।
स्वैच्छिक रक्तदाताओं को आवश्यकता पड़ने पर जिले के बाहर खून लेने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। कभी-कभी तो समय से खून न मिलने पर मरीजों को जान तक गंवानी पड़ जाती है। रक्तदाता चाहकर भी किसी जरूरतमंद को दूसरे जिले में ब्लड नहीं उपलब्ध करवा पाते है। पहले नियम के तहत उन्हें सिर्फ जिले में ही अपने डोनर कार्ड के एवज में खुद को या किसी दूसरे को खून देने की सहूलियत थी। अब नए नियम के मुताबिक स्वैच्छिक रक्तदाताओं को खून की जरूरत पड़ने पर डोनर कार्ड प्रदेश के किसी भी राजकीय ब्लड बैंक से खून आसानी से ले सकेंगे। अब डोनर कार्ड प्रदेश के सभी राजकीय ब्लड बैंक में मान्य होगा।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ महेश प्रसाद ने बताया कि नए नियम से रक्तदाताओं को समस्या नहीं होगी। कहीं से भी राजकीय ब्लड बैंक से रक्त ले सकते हैं।
ब्लड बैंक में बने हैं 120 डोनर कार्ड
इस वर्ष जनवरी से अब तक 20 रक्तदान शिविर लगाया जा चुका है। करीब 120 लोगों का डोनर कार्ड बना है। ब्लड बैंक की क्षमता 300 यूनिट रक्त की है। हर माह औसतन 60 से 70 यूनिट रक्त जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को चढ़ता है।
बड़े काम का है डोनर कार्ड
मर्जी से किसी भी ब्लड बैंक में जाकर रक्तदान करने वालों को ब्लड बैंक की ओर से एक कार्ड जारी होता है। जिसे डोनर कार्ड कहा जाता है। इस कार्ड के एवज में रक्तदाता अपने रक्तदान से अगले तीन माह तक जरूरत पड़ने पर खुद या किसी जरूरतमंद को ब्लड बैंक से नि:शुल्क खून ले सकता है। पहले के नियम के तहत डोनर कार्ड की मान्यता सिर्फ उसी जिले तक मान्य थी। जहां से वह जारी हुआ है। मगर नई व्यवस्था के तहत अब जिले के बाहर भी यह कार्ड मान्य होगा।
नियम में बदलाव से समस्या नहीं होगी। डोनर कार्ड रहने पर कहीं से जरूरतमंद को रक्त दिया जा सकेगा। रक्तदान के लिए समय-समय पर सभी को प्रोत्साहित किया जाता है।
- डॉ एपी मिश्र, ब्लड बैंक प्रभारी
शिविर के माध्यम से रक्तदान कराने में सहयोग किया जाता है। व्हाट्सअप ग्रुप के जरिए लोगों की मदद की जाती है। अब नियम में बदलाव से भटकना नहीं पड़ेगा।
- अमित जैन, समाजसेवी