- संसाधन और डॉक्टरों की कमी बरकरार, मरीज हो रहे परेशान
संवाद न्यूज़ एजेंसी
संतकबीरनगर। हैंसर और पौली ब्लॉक क्षेत्र की तीन लाख की आबादी के स्वास्थ्य की देखभाल करने की जिम्मेदारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मलौली पर है। आलम यह है कि इस अस्पताल पर न तो एक्स-रे की सुविधा मिल पा रही है और न ही अल्ट्रासाउंड की। यहां कई रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं हैं। इसके बाद भी यहां 250 से 300 मरीज रोजाना ओपीडी में पहुंचते हैं। जांच के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता है तो गंभीर रोगों के इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता हैं। इन दिनों सबसे अधिक परेशानी आंख से संबंधित मरीजों को हो रही है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मलौली पर सर्जन, बाल रोग और नेत्र रोग विशेषज्ञ की तैनाती इस समय नहीं है। बुधवार को नेत्र रोग से परेशान मरीज अस्पताल पहुंचे। राम ललित, राजेश कुमार, प्रेम नारायण, संदीप कुमार, प्रमिला देवी, कुमारी प्रिया आदि का कहना था कि चार दिनों से उनकी आंख लाल है। आंख में दर्द भी हो रहा है। प्राइवेट डॉक्टरों को दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
यह सोचकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मलौली पहुंचे कि नेत्र रोग विशेषज्ञ होंगे। उनको दिखा कर अस्पताल से निशुल्क दवा भी ले लेंगे। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद पता चला कि कोई नेत्र रोग का डॉक्टर नहीं है। ओपीडी में बैठे डॉक्टर ने जो दवा लिखी। वह अस्पताल पर मिलने वाली भी नहीं है।
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन न होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है। पैथोलॉजी संचालक मनमाने रेट पर जांच रिपोर्ट देते हैं। अस्पताल में एक्स-रे मशीन तो है लेकिन करीब एक वर्ष से कोई संचालक नियुक्त नहीं है। जिसके कारण वह बंद पड़ी हुई है।
दिलचस्प बात ये है कि कि दोपहर 2 बजे के बाद अस्पताल पर वही डॉक्टर मिलते हैं जिनकी ड्यूटी इमरजेंसी में लगी होती है। सबसे बड़ी समस्या प्रसूताओं को उस समय झेलनी पड़ती है जब देर-सवेर उनकी या नवजात की तबीयत खराब हो जाती है। अस्पताल में महिला चिकित्सक नहीं मिलती हैं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि कभी इस इलाके के लिए वरदान साबित होने वाला सीएचसी मलौली अधिकारियों कर्मचारियों के उदासीनता के चलते अभिशाप बनता जा रहा है।
कोट
अस्पताल पर जो भी सुविधाएं मौजूद हैं उससे मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जो भी दवाएं अस्पताल पर मौजूद हैं उन दवाओं को मरीजों को हर हाल में उपलब्ध कराया जाता है।
-डॉक्टर रवि कुमार, सीएचसी अधीक्षक