संतकबीरनगर। अगर आप शहर समेत जिले के अन्य किसी होटलों में ठहरने की सोच रहे हों, तो अपनी सुरक्षा का इंतजाम पहले समझ लें, क्योंकि इनमें आपके साथ कोई हादसा हो गया तो किसी भी तरह का दावा आप नहीं कर सकेंगे। दरअसल, शहर के दो होटलों को छोड़ दें तो 13 होटल पर्यटन विभाग का कोई नियम कायदा नहीं मानते। पर्यटन विभाग के अफसर ऐसे होटल और लॉज को नोटिस जारी करेंगे, ये होटल बिना पर्यटन विभाग की अनुमति के संचालित हो रहे हैं।
सराय एक्ट में पंजीकरण के लिए होटल, लॉज और गेस्ट हाउस प्रबंधन को खाद्य सुरक्षा, अग्निशमन विभाग, पर्यावरण विभाग, बिजली निगम, नगर पालिका से एनओसी और पुलिस अधीक्षक से चरित्र प्रमाणपत्र लेना होता है। इतने विभागों से एनओसी लेने के लिए होटल में सब कुछ नियम कायदे के मुताबिक ही होना चाहिए, लेकिन इन सबसे बचने के लिए होटल प्रबंधन, सराय एक्ट के तहत पंजीकरण ही नहीं करा रहे हैं। ऐसे होटल संचालकों को पर्यटन विभाग नोटिस भेजने वाला है। खलीलाबाद शहर के दो प्रमुख होटल छोड़ दें तो 13 होटलों की व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। ग्राहकों की सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोई गारंटी लेने वाला नहीं है। यदि किसी ग्राहक के साथ कोई अनहोनी या गड़बड़ी हो भी जाए तो वह किसी तरह की शिकायत या दावा करने की स्थिति में नहीं होता, जबकि आए दिन इन होटलों में ग्राहकों के साथ किसी न किसी घटना की शिकायतें पुलिस तक पहुंचती ही रहती हैं। यदि पर्यटन विभाग या प्रशासन के अफसरों तक शिकायत पहुंचती भी है, तो नियमों के तहत किसी दावे का आधार ही नहीं बनता, क्योंकि होटल गेस्ट हाउस का रजिस्ट्रेशन ही नहीं होता, सिर्फ नाम पर यह सब चल रहा है। रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं है। ऐसे में सिर्फ एक ही रास्ता रह जाता है और वह है पुलिस। ग्राहक पुलिस को यदि राजी कर भी लेती है तो होटल संचालक वहां भी निपट ही लेते हैं।
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अंग्रेजों के जमाने के नियमों की आड़ में मनमानी
ब्रिटिश काल में वर्ष 1867 में सराय एक्ट बनाया गया था। अंग्रेजों के जमाने के इस एक्ट में आज भी होटलों का पंजीकरण किया जा रहा है। एक्ट में सराय से आशय ऐसे भवन माने गए, जिसे यात्रियों के आश्रय और आवास के लिए प्रयोग में लाया जाता हो। एक्ट में प्रावधान है कि डीएम कार्यालय में एक रजिस्टर रखा रहेगा, इसमें वह स्वयं या उसके जरिये नामित व्यक्ति अपने अधिकार क्षेत्र के अंदर आने वाली सभी सरायों, सरायपालों के नाम, निवास स्थान की प्रविष्टि करेगा, लेकिन इन नियमों से कोई डरता नहीं है, इसलिए मनमानी जोरों पर है।
होटल संचालकों को सराय एक्ट में पंजीकरण कराना जरूरी है। नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा। जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है, उनको नोटिस जारी कर जल्दी से पंजीकरण कराया जाएगा।
- विकास नारायण, पर्यटन अधिकारी