संतकबीरनगर। ग्रामीण क्षेत्र में लोगों की सेहत की चिंता करने वाले स्वास्थ्य उप केंद्र बदहाल हैं। इनमें से कई जर्जर हालत में हैं। यहां न तो पानी का इंतजाम है और न ही बिजली की व्यवस्था है। ऐसे में इस भीषण गर्मी में कर्मचारियों के साथ ही मरीज व उनके तीमारदार परेशान हो रहे हैं।
लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए जिले के नौ ब्लॉकों में 251 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन अधिकतर उप केंद्रों की व्यवस्था जैसे-तैसे चल रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 31 उप केंद्र भवन जर्जर हो चुके हैं। इनमें हैंसर बाजार के चपरापूर्वी, तामा, दौलतपुर, बभनौली, मलौली, बघौली ब्लॉक के अमाए, महनी, परदेशवा, धनखिरिया, पचपोखरी, बकहा, मेंहदावल ब्लॉक के भिटियाकलां, परसा पांडेय, रानीपुर, सांथा ब्लॉक के मोतीपुर, लोहरसन, खलीलाबाद ब्लॉक के दुधरा, मगहर, बड़गों, कोल्हुआ उप केंद्र शामिल हैं।
इसके साथ ही सेमरियावां ब्लॉक के ऊंचहराकला, कांटेधीश, बेलहर कला के मंझरिया पठान, रमवापुर, पिपरा प्रथम, भेडौरा पिकौरा, पौली ब्लॉक के शिवबखरी, रोसयाबाजार आदि शामिल है। इसके साथ ही जो उप केंद्र संचालित है वहां पर बिजली व पानी की व्यवस्था तक नहीं है। जर्जर भवन से बारिश के समय पानी टपकता है। ऐसे में इन उप स्वास्थ्य केंद्रों पर रहने वाले कर्मी परेशान हैं। इसके साथ ही इस गर्मी में पानी और बिजली के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। इन उप केंद्रों पर आने वाले मरीज भी व्यवस्था न मिलने से लौट जाते हैं।
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जो उप स्वास्थ्य केंद्र जर्जर घोषित हैं, उनके मूल्यांकन के लिए लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मूल्यांकन रिपोर्ट मिलने के बाद उसे शासन में भेजा जाएगा। बजट मिलने पर उप केंद्रों का कायाकल्प करा दिया जाएगा।
-राजेश कुमार, जेई, सीएमओ कार्यालय