संतकबीरनगर। जिले में हुए यूरिया घोटाले का आरोपी भंडार नायक पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के प्रयास में जुटा हुआ है। हाईकोर्ट में दाखिल आरोपी की रिट खारिज हो गई। आरोपी ने सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल कर दी है। जिस पर एक नवंबर को कोर्ट में सुनवाई होनी है। इधर पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है। वहीं दूसरी तरफ अभिलेख नहीं मिलने से एआर कोऑपरेटिव की टीम जांच नहीं कर पा रही है।
डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने 23 सितंबर को टीम गठित कर पीसीएफ बफर गोदाम कोनी में भंडारित उर्वरक का भौतिक सत्यापन कराया। सत्यापन में आईएफएमएस के अनुसार पीसीएफ बफर गोदाम में यूरिया उर्वरक 1911.915 मीट्रिक टन होनी चाहिए थी। मौके पर 1087.984 मीट्रिक टन यूरिया ही पाई गई। जबकि स्टाॅक में 823.916 मीट्रिक टन यूरिया गायब मिली। इतना ही नहीं, जांच में बिना प्वाइंट ऑफ सेल मशीन के उर्वरक की बिक्री होनी पाई गई। किसानों को उर्वरक खरीद की रसीद भी नहीं दी गई है। जिला कृषि अधिकारी ने इस मामले में दोषी पाए गए भंडार नायक राम सजीवन के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया। इस मामले में पीएसीएफ की जिला प्रबंधक अंजना नायक और दोषी भंडार नायक रामसजीवन निलंबित कर दिए गए थे। विवेचक इंस्पेक्टर क्राइम बृजेश यादव ने बताया कि आरोपी भंडार नायक राम सजीवन पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी। जिसमें दर्ज एफआईआर को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक की मांग की थी। हाईकोर्ट ने आरोपी की रिट को खारिज कर दी है। इधर, आरोपी ने जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत अर्जी दाखिल कर दी है। इस पर एक नवंबर को सुनवाई होनी है। विवेचक ने बताया कि आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है, लेकिन वह पकड़ से दूर है।
दूसरी तरफ प्रकरण की जांच कर रहे जांच अधिकारी अपर सहकारिता अधिकारी रवि श्रीवास्तव ने बताया कि पीसीएफ के जिला प्रबंधक से जांच के लिए अभिलेख मांगा गया है, लेकिन अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने से जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।