संतकबीरनगर। क्षय रोग विभाग और सेंटर फॉर हेल्थ रिसर्च एंड एनोवेशन (सीएचआरआई) के तत्वावधान में शनिवार को एक होटल में कार्यशाला हुई। इसमें टीबी रोग से बचाव की जानकारी दी गई।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एसडी ओझा ने कहा कि प्राइवेट चिकित्सक किसी भी टीबी मरीज का इलाज करें तो उसका ब्यौरा निक्षय पोर्टल पर अवश्य दर्ज करें। टीबी मरीजों का यह नोटिफिकेशन अनिवार्य है। इस संबंध में क्षय रोग विभाग तकनीकी सहयोग देता है। नोटिफिकेशन से टीबी का मरीज सिस्टम में आ जाएगा और उसे कई सुविधाएं मिलेंगी, जिससे क्षय रोग का 2025 तक उन्मूलन संभव हो पाएगा। बिना सूचना दिए टीबी मरीजों का इलाज करने वाले प्राइवेट चिकित्सकों पर कार्रवाई का भी प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि नियमानुसार टीबी का इलाज करने वाले अस्पताल, जांच करने वाले पैथालॉजी सेंटर एवं दवा बिक्री करने वाले मेडिकल स्टोर संचालक को मरीज के बारे में सूचना देना अनिवार्य है। दवा के साथ-साथ टीबी मरीज को प्रतिमाह पोषण के लिए 500 रुपये आर्थिक सहायता दी जाती है। यदि मरीज निजी अस्पताल में इलाज कराता है तो भी उसके बैंक खाते में यह राशि भेजी जाती है, जबकि टीबी मरीज की सूचना देने पर अस्पताल को 500 रुपये और उसे रोग मुक्त करने में मदद करने पर 500 रुपये के हिसाब से कुल एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
कार्यशाला में डॉ. विशाल यादव, डॉ. एनएस त्रिगुण, डॉ. मोइन अख्तर, अमित आनंद, डॉ. सोनी सिंह, डॉ. आलोक सिन्हा, डॉ. अखिलेश चंद्र, डॉ. अख्तर, डॉ. अशरफ अली, रामबास विश्वकर्मा, कविता पाठक, उत्कर्ष पाठक रविशंकर आदि मौजूद रहे।