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Sant Kabir Nagar News: जरूरी जांच, अल्ट्रासाउंड और एक्सरे के लिए भटकते हैं मरीज

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सेमरियावां सीएचसी में जांच कराने के लिए लगी मरीजो की भीड़।संवाद
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सेमरियावां। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरियावा को फर्स्ट रेफरल यूनिट बनाए जाने का दावा कागजों तक सीमित होकर रह गया है। अस्पताल विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। सीएचसी में डॉक्टरों की तैनाती तो है, लेकिन विशेषज्ञ का अभाव है। इस कारण मरीजों को जिला अस्पताल व बस्ती जाने की मजबूरी बनी हुई है। जांच के लिए मरीजों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। अल्ट्रासाउंड और एक्सरे तक की व्यवस्था नहीं है।
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30 शैय्या वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरियावां पर इलाज के लिए जनपद के सेमरियावां ब्लॉक के साथ ही आंशिक रूप से बघौली, बेलहर कला, सांथा, बस्ती जनपद के साऊंघाट, रुधौली आदि ब्लॉकों के साथ सेमरियावां ब्लॉक क्षेत्र से सटे गांवों के लोग इलाज के लिए आते हैं। इस हॉस्पिटल पर पांच लाख से अधिक जनसंख्या इलाज के लिए आश्रित है। प्रतिदिन 600 मरीज इलाज के लिए आते हैं। सेमरियावां सीएचसी पर 11 डॉक्टर तैनात हैं। दो एलटी, एक एलए, तीन वार्ड ब्याॅय, तीन फार्मासिस्ट और 48 एएनएम, चार स्टाफ नर्स और 280 आशा की तैनाती हैं। 12 वर्ष पूर्व इस हॉस्पिटल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिला, तो लोगों को यहां बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद जगी, लेकिन अब तक निराशा हाथ लगी है।
मार्च 2021 में उत्तर प्रदेश परिवार कल्याण महानिदेशालय ने इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को प्रथम संदर्भन इकाई (फर्स्ट रेफरल यूनिट) बनाए जाने की अधिसूचना जारी की। विभाग के अधिकारियोें ने बताया था कि एफआरयू बन जाने से यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, एनआईसीयू का निर्माण, जनरल सर्जरी, ब्लड स्टोरेज यूनिट गंभीर रोगों के लिए जरूरी जांचों की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।
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ईएनटी व हड्डी रोग, नेत्र रोग, चर्म रोग विशेषज्ञ की कमी
नाक-कान व गला रोग विशेषज्ञ न होने से संबंधित मरीजों को फिजीशियन देख रहे हैं। विशेषज्ञ न होने से मरीज ऐसे डॉक्टरों के इलाज से संतुष्ट नहीं हो पा रहे हैं, जिसके चलते प्राइवेट अस्पतालों या फिर जाकर इलाज कराना बेहतर समझ रहे हैं। इसी तरह हादसे में घायलों के इलाज के लिए अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है, जिससे ऐसे मरीजों को तत्काल प्रभाव से रेफर कर दिया जा रहा है। यही कारण है कि निजी अस्पतालों में बीमार बच्चों की संख्या अधिक देखी जा रही है।
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इंजेक्शन, टांका लगाना, दवा व मरहम-पट्टी ही संभव
उसराशहीद के इरशाद अहमद, सेमरियावां के अबूजर चौधरी, बाघनगर के एजाज अहमद, डड़वामाली के संतोष कुमार प्रजापति आदि ने बताया कि यहां सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ आदि रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की पोस्टिंग के लिए पद स्वीकृत है, लेकिन पद के सापेक्ष चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो सकी है। यदि सीएचसी में सीटी स्कैन, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड समेत अन्य संसाधन मुहैया हो जाए तो सीएचसी में मरीजों को पूरा इलाज मिल सके। प्राथमिक उपचार में मरीजों को इंजेक्शन, टांका लगाना, दवा व मरहम-पट्टी ही संभव होता है। इस कारण लोगों को काफी परेशान होना पड़ता है।
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मरीज पसीने से हो रहे सराबोर, पेयजल व्यवस्था भी नहीं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इस अस्पताल के बरामदे में बुधवार को कुत्ता सोता हुआ मिला। प्रतीक्षालय में पंखा नही है, मरीज पसीना से सराबोर रहे। पेयजल व्यवस्था भी नहीं है।
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धूल फांक रही पैथोलॉजी में मशीनें
सीएचसी की पैथालोजी में सीबीसी की जांच मशीन धूल फांक रही है। एक माह से रीजेंट (जांच केमिकल) नहीं है। इससे मरीजों की जांच नहीं हो रही है। लैब असिस्टेंट सुरेंद्र कुमार, लैब असिस्टेंट जय प्रकाश, लव कुश मौर्य तकनीशियन मौजूद हैं। लैब असिस्टेंट सुरेंद्र कुमार ने बताया कि अपनी पूरी क्षमता से काम करते हैं। रीजेंट के लिए डिमांड की गई है।
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एक्स-रे के लिए तैनात है तकनीशियन, नहीं है एक्सरे मशीन
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरियावां में 11 वर्ष पूर्व एक्स रे मशीन के लिए पैनल आया था। कुछ पार्ट के अभाव में मशीन इंस्टॉल नहीं हो पाई थी। एक्सरे मशीन न होने के बावजूद भी यहां एक एक्स-रे तकनीशियन चंद्र मणि चौधरी की तैनाती है, लेकिन उन्हें एक्सरे मशीन न होने के कारण कोई काम ही नहीं रहता। यही नहीं इतने बड़े अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इसलिए गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीज स्थानीय बाजारों में फैले अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जांच कराने को मजबूर हैं तो कुछ लोगों को विश्वसनीय अल्ट्रासाउंड जांच के लिए खलीलाबाद- बस्ती जाना पड़ता है।
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जरूरी संसाधनों के लिए जिला स्तर के अधिकारियों को कई बार पत्राचार किया गया है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास जारी है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।
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-डॉ. सुरेश चंद्रा, अधीक्षक, सीएचसी सेमरियावां
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