- छह मासूम बच्चों का कौन होगा पालनहार, सोचकर सभी गांव वाले गमगीन
धनघटा। एक छोटा सा मोबाइल एक इंसान के जीवन से ज्यादा कीमती हो गया। मोबाइल गायब होने का गुस्सा इतना कि एक आदमी की जान तक ले ली और एक परिवार की हंसती हुई दुनिया उजड़ गई। दीनानाथ के परिवार ने मोबाइल चोरी की थी या नहीं, यह तो जांच में पता चलेगा, लेकिन आरोप सही साबित नहीं हुए तो क्या उसकी जिंदगी लौट आएगी।
धनघटा क्षेत्र के सोनडीहा गांव निवासी 41 वर्षीय दीनानाथ मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का खर्च चलाते थे। कभी गांव पर रहकर मजदूरी करते थे तो कभी लुधियाना दिल्ली जाकर ईंट सीमेंट की ढुलाई करके परिजनों का पेट पालते थे। गांव वालों का कहना है कि अभी दो महीने पहले दीनानाथ बाहर से आए थे। दीनानाथ जब घर पर नहीं रहते थे तो उनकी पत्नी सुमित्रा, माता मालती, दीनानाथ की 15 वर्षीय बेटी चंदा, 13 वर्षीय बेटा सूरज, 11 वर्षीय बेटी लक्ष्मीना, आठ वर्षीय बेटी रंजना, पांच वर्षीय बेरा जीवधन तथा तीन वर्षीय बेटा शंभू के साथ घर पर रहकर उनका देखभाल करने के साथ ही मजदूरी करते थे। जिससे परिवार का खर्च चलता था। एक दिन सब ठीक हो जाएगा इसी उम्मीद में जिंदगी की गाड़ी ऐसे ही चल रही थी।
इसी बीच 15 दिन पहले उनके पड़ोस के रहने वाले एक व्यक्ति का मोबाइल फोन कहीं गायब हो गया। वह व्यक्ति तथा उसके परिवार के लोग मोबाइल की तलाश तभी से कर रहे थे। मंगलवार की सुबह करीब नौ बजे जिसका मोबाइल गायब हुआ था, उनके परिवार के लोग दीनानाथ के परिजनों को अपशब्द कहने लगे। जब दीनानाथ की पत्नी ने मना किया तो लोग उसे मारने पीटने लगे। माता के बचाव में बेटा सूरज गया तो उसे भी मारना शुरू कर दिए। पत्नी और बेटे पर हमला होता देख दीनानाथ ने जब बीच बचाव की कोशिश की तो हमलावरों ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया, जिसमें उनकी मौत हो गई। दीनानाथ की मौत से परिवार में कोहराम मच गया है। छोटे-छोटे बच्चों का पालनहार कौन होगा कैसे उनके घर का चूल्हा जलेगा, इस बात को लेकर उनके दरवाजे पर जुटी भीड़ गमगीन थी।