25 अधिकारी, कर्मचारियों ने बिजली बिल के संशोधन के नाम पर किया खेल
- तीन साल तक किया गया फर्जीवाड़ा, सभी को दिया गया आरोप पत्र
- एसडीओ विवेक पांडेय की शिकायत पर हुई जांच में खुला मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिले में विद्युत निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से तीन साल तक बिजली बिलों में संशोधन के नाम पर खेल किया गया। अधिकारियों व कर्मचारियों ने मनमाने ढंग से बिल को कम कर दिया।
विद्युत उपकेंद्र हरिहरपुर के एसडीओ विवेक पांडेय की शिकायत के बाद हुई जांच में यह मामला उजागर हुआ है। इसमें तीन अधिशाषी अभियंता, चार एसडीओ, चार जेई, तीन क्लर्क व 11 राजस्व संग्रहकर्ता दोषी पाए गए हैं। इन कर्मियों को आरोप पत्र व्यक्तिगत रूप से दिया गया है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के विद्युत वितरण खंड खलीलाबाद में एक दिसंबर 2016 से 30 नवंबर 2019 के बीच उपभोक्ताओं के विद्युत बिलों में संशोधन के नाम पर खेल किया गया। उपभोक्ताओं के बिलों को मनमानी ढंग से कम कर दिया गया।
ऐसा नहीं कि अधिकारी इससे अनजान थे, जब एसडीओ ने पहली बार इसकी शिकायत अधिकारियों से की तो अधिशाषी अभियंता ने अपनी आईडी हैक होने की बात कही थी। कुछ दिनों तक यह मामला ठंडा पड़ा रहा है, लेकिन बाद में खेल फिर शुरू हो गया।
इस बीच इसकी शिकायत मुख्य अभियंता बस्ती और पावर कार्पोरेशन लखनऊ को पत्र लिखकर की गई और कहा गया कि बिजली बिलों में गलत तरीके से उपभोक्ताओं का बिल कम कर राजस्व को क्षति पहुंचाई गई। इसकी जांच हुई तो गड़बड़ी की प्रथम दृष्टयां पुष्टि भी हो गई।
यह पाए गए दोषी
बिजली बिल के खेल में तत्कालीन अधिशाषी अभियंता संजय कुमार सिंह, राजकुमार सिंह, एसडीओ डीडी शर्मा, अजय गुप्ता, प्रेम प्रकाश, राम सुधार, जेई कामतानाथ राव, चंद्रभूषण, भानुप्रताप चौसरिया, संजय यादव, राजस्व संग्रहकर्ता भाष्कर पांडेय, हफीजुर्रहमान, जय प्रकाश, कृष्ण मिश्रा, लालचंद, सूरज प्रजापति, वीरेंद्र कुमार, रमाकांत मौर्य, आशुतोष कुमार, हरिप्रसाद, सुनील प्रजापति, योगेश पांडेय, विशाल कन्नौजिया, संजीव प्रजापति शामिल हैं।
कोट
विशेष ऑडिट टीम की जांच में जो लोग दोषी मिले हैं, उन्हें व्यक्तिगत रूप से आरोप पत्र दिया गया है। सभी के खिलाफ पावर कार्पोरेशन द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- दिव्य रंजन, अधिशाषी अभियंता