एसडीएम-सीओ की जांच में सीसीटीवी भी मिला खराब, आपसी समन्वय की कर्मी से महिला पुलिस कर्मी और वन स्टॉप के कर्मियों में होता है विवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। वन स्टाॅप सेंटर में संरक्षित की जाने वाली पीड़िताओं से भोजन बनवाने और आरोपियों के परिजनों से गलत पहचान पत्र पर मुलाकात कराए जाने का मामला जांच में उजागर हुआ है। इतना ही नहीं यहां तैनात महिला पुलिस कर्मियों और वन स्टॉप सेंटर में कार्यरत महिला कर्मियों में आपसी टकराव की स्थिति बनी हुई है।
वन स्टॉप सेंटर में तैनात महिला पुलिस कर्मी नीता प्रसाद, अंजनी गुप्ता, शिमला मिश्रा, ममता यादव, पूनम राव ने एसपी को प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें वन स्टॉप सेंटर में कार्यरत महिला कर्मियों के जरिए दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायत की। एसपी ने डीएम को पत्र भेजकर प्रकरण की जांच कराए जाने की जरूरत जताई। डीएम ने प्रकरण की जांच के लिए एसडीएम सदर शैलेश दूबे, सीओ सदर दीपांशी राठौर और जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉक्टर श्वेता त्रिपाठी को जिम्मेदारी दी। इस प्रकरण में एसडीएम और सीओ ने संयुक्त रूप से जांच की और डीएम को रिपोर्ट दिया। जबकि जिला प्रोबेशन अधिकारी ने अपनी अलग जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी। एसडीएम और सीओ की जांच में पाया गया कि वन स्टॉप सेंटर में बाहर की तरफ दो सीसीटीवी कैमरा लगा है, लेकिन कोई भी कैमरा चालू हालत मेंं नहीं है। जससे यहां आने-जाने वालों की जानकारी नहीं हो सकती है। वन स्टॉप सेंटर में कार्यरत महिला आरक्षी,महिल होमगार्ड एवं वन स्टॉप सेंटर में कार्यरत संरक्षिका व अन्य महिला कर्मियों में आपसी समन्वय नहीं है। यह एक -दूसरे पर दोषारोपण करती रहती है और आपस में विवाद की स्थिति पैदा करती है। जांच के दौरान पता चला कि कार्यरत नर्स एक सप्ताह से ड्यूटी पर नहीं आई है। यहां कार्यरत स्टॉप नर्स ड्यूटी पर कम आती है। यहां सेवा प्रदाता के माध्यम से काम करने वाली महिलाओं को सात-आठ महीने से वेतन नहीं मिला है। जिसके कारण उनमें रोष व्याप्त है और कार्य करने में रुचि नहीं ली जाती है। वन स्टॉप सेंटर भवन में ऊपर की तरफ खुला हुआ है,जिससे बालकनी में किसी व्यक्ति के आने-जाने की संभावना बनी रहती है। फोटो लिए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जाता है। वन स्टॉप सेंटर पर जो अपहृता मिलने के बाद यहां लाई जाती है,उनसे कार्य करवाया जाता है और भोजन बनवाया जाता है। आरोपियों के घर वालों का गलत पहचान से प्रवेश करा कर पीड़िताओं से मिलवाया जाता है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों से अनुचित लाभ लेकर पीड़िताओं से मिलवाया जाता है। संवाद
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चोरी के आरोप में अपहृत किशोरी की हुई थी पिटाई
संतकबीरनगर। जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉक्टर श्वेता त्रिपाठी की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि वन स्टॉप सेंटर योजना के मद में वित्तीय वर्ष 2022-23 में विभाग के द्वारा कोई बजट प्राप्त नहीं हुआ है। पीड़िताओं के लिए भोजन मल्टीपरपच कर्मचारियों के जरिए ही बनाया जाता है, लेकिन कभी-कभी बालिकाएं अपने स्वाद के अनुसार भोजन स्वयं बनाकर खाना चाहती हैं। बजट का आवंटन नहीं होने की वजह से कार्मिकों को कई माह से वेतन नहीं मिलने से उनमें अत्यधिक रोष है।
सात अगस्त को महुली पुलिस ने एक अपहृत किशोरी को वन स्टॉप सेंटर में संरक्षित किया था। जिसका कोर्ट में दस अगस्त को बयान दर्ज कराया गया और उसे दोपहर में कार्यालय पहुंचाया गयाग्। चार बजे पता चला कि किशोरी अपने कक्ष में नहीं है। इसकी सूचना एलआईयू को दी गई और पुन: किशोरी मिल गई और यहां लाई गई। महिला आरक्षी पूजा चौहान के जरिए शाम पांच बजे किशोरी को वन स्टॉप सेंटर लाया गया। किशोरी वन स्टॉप सेंटर में रुकना नहीं चाहती थी। वजह यह है केस वर्कर प्रतिमा चंद का 17,000 रुपये और पायल लेकर किशोरी भागी थी। महिला सिपाही पूजा चौहान,नीता कुमारी व प्रतिमा चंद केस वर्कर से छुडाकर भागने का प्रयास करने लगी। जिसकी वजह से तीनों कर्मचारियाें और किशोरी के बीच हाथापाई हो गई। किशोरी यह मान रही थी कि वह छत से भागी है और चोरी की है और कहने लगी कि वह मुख्य द्वार से गई है। जिससे महिला पुलिस कर्मी नाराज हो गई और प्रतिमा चंद केस वर्क भी अपने चोरी के कारण नाराज थी। उसी गुस्से की वजह से तीनों लोगों ने किशोरी को मारा था। उसी रात में दस बज कर 49 मिनट पर किशोरी को सीडब्लूसी के बिना आदेश के किशोरी को उसकी मां को महिला आरक्षी पूजा चौहान व उप निरीक्षक रामचंद्र सिंह अपने साथ बिना बताए लेकर चले गए। वन स्टॉप सेंटर का सीसीटीवी कैमरा ठीक करा दिया गया है। यहां तैनात महिला कल्याण विभाग, पुलिस विभाग और होमगार्ड विभाग के कर्मचारी कार्य कर रहे है। लगभग सभी कर्मचारी महिला ही है। जिनका आपस में सामंजस्य नहीं बन पा रहा है। वैसे समय- समय पर समन्वय एवं सहयोग बनवाए रखने के लिए प्रेरित किया जाता है। संवाद
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यह सच है कि वन स्टॉप सेंटर का कैमरा जांच के दौरान खराब था, लेकिन अब ठीक करा दिया गया है। वर्तमान में यहां दस का स्टॉप है। 17 महीने में तीन महीने का वेतन कर्मियों को मिला है। दो मल्टीपरपज महिलाएं साफ-सफाई और भोजन बनाने के लिए रखी गई हैं। महुली पुलिस के जरिए वन स्टाप सेंटर लाई गई एक किशोरी एक केस वर्कर का 17,000 रुपये और पायल चोरी करके भाग गई थी और बाद में पुलिस पकड़ कर यहां लाई। पूछताछ में किशोरी ने 3,000 रुपये और पायल चोरी करने की बात स्वीकार की थी। वर्तमान में यहां तीन किशोरियां सरंक्षित हैं। यहां आपसी सामंजस्य स्थापित करके माहौल को बेहतर बनाए जाने की कोशिश की जाती है।
ऋतुका दूबे, केंद्र प्रशासक, वन स्टॉप सेंटर
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चार दिन पूर्व खुद वन स्टाप सेंटर की जांच कर वहां की स्थिति जानी है। वहां खामियां मिली थी। इधर एसडीएम-सीओ की संयुक्त जांच रिपोर्ट के साथ जिला प्रोबेशन अधिकारी की अलग जांच रिपोर्ट मिली है। दोनों जांच रिपोर्ट को एडीएम राजस्व एवं वित्त जय प्रकाश को परीक्षण के लिए भेज दिया है। एडीएम के परीक्षण के बाद जो भी दोषी होंगे,उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संदीप कुमार,डीएम