- हैसर बाजार व पौली के 32 गांव में हो रहा मनरेगा के तहत मिट्टी कार्य
संवाद न्यूज़ एजेंसी
संतकबीरनगर। रोजाना हो रही बारिश से पोखरों और खेतों में पानी भरा हुआ है। लेकिन इसका असर विकास खंड हैंसर बाजार और पौली के 32 ग्राम पंचायतों में नहीं है। ग्राम पंचायतों में कागज में ही सही जॉब कार्ड धारकों प्रतिदिन रोजगार दिया जा रहा है। गांववालों का कहना है कि महीना-दो महीना पहले जो काम ट्रैक्टर से कराए गए थे। उसी पर अब मस्टरोल चलाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है।
विकास खंड हैसर बाजार के ग्राम पंचायत औराडाड, बैजनाथपुर, बकौली कला, बसवारी गांव, भैसाखुट, भैंसही, भरवल पर्वता, डेबरी, डुहिया कला, गोपीपुर, हकीमपुर, कनैला, कटार मिश्र, कोचरी, मदरा, मुंडेरा राय में 30 परियोजनाओं पर मिट्टी का कार्य चल रहा है। जिसमें कुछ गांव में अमृत सरोवर और पोखरे की खुदाई भी हो रही है।
इसी तरह विकास खंड पौली के अंजाव, मटौली, बगही, चौरा कला, छितौनी, धौरहरा, हडिया माफी, खैरा, किशनपुर, खर्चा, कोहलवा, मकदुमपुर, मुठही खुर्द, नरायनपुर, रानीपुर, शनिचरा बाजार में 26 परियोजनाओं पर मनरेगा के तहत मिट्टी पटाई और खुदाई कार्य किया जा रहा है।
ग्रामीण राम भरत, शिवराम, चंद्र कुमार, सुरेश, हरिराम आदि से जब मनरेगा के तहत कार्य चलने की बाबत पूछा गया तो उनका कहना था कि जिन परियोजनाओं पर इस समय मस्टरोल चलने और हाजिरी लगने की बात बताई जा रही है। उन पर महीनों पहले ट्रैक्टर से कार्य कराया गया था। इस समय जब तालाब में पानी भरा हुआ है और खेत में धान की रोपाई या तो कर दी गई है या हो रही है। ऐसे में मिट्टी का कार्य कैसे किया जा सकता है।
पोखरे की खुदाई का कार्य रोक दिया गया है। चकरोड पर मिट्टी डाली जा सकती है। मजदूरों की हाजिरी लगेगी तभी काम कराए जाने की बात हो सकती है। अगर हाजिरी नहीं लगती है तो मस्टरोल निकलना मायने नहीं रखता है।
- ऋषि सिंह, एपीओ