धनघटा। कृषि विज्ञान केंद्र बगही पर शुक्रवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें किसानों को हरी खाद बनाने के गुर सिखाएं गए। कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार ने बताया कि मुफ्त उर्वरक पाने का आसान तरीका यह है कि ढैंचा की खेती करें।
उन्होंने कहा कि ढैंचा से हरी खाद बनाने के लिए सबसे पहले इसे उसी खेत में उगाया जाए, जिसमें हरी खाद की जरूरत है। जब इसके पौधे डेढ़ से दो फुट के हो जाएं तो खेत की जुताई करें। इससे पौधे मिट्टी के नीचे दब जाते हैं और हरी खाद बन जाते हैं।
उन्होंने कहा कि ढैंचा की हरी खाद से मिट्टी में नाइट्रोजन की जरूरत होती है। ढैंचा की फसल 40 से 45 दिनों में पलटाई योग हो जाती है। यदि किसान अभी ढैंचा की खेती कर दें तो 20 से 25 जून तक उसे आसानी से पलटकर खाद बनाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि हरी खाद से खेत की भौतिक दिशा बदल जाती है। खेत में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है। मृदा सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या एवं क्रियाशीलता बढ़ जाती है तथा मिट्टी में प्रयोग किए जाने वाले उर्वरकों का पौधे आसानी से ग्रहण कर पाते हैं।
इससे मानसून पूर्व एवं मानसून की प्रारंभिक अवस्था में वर्षा जल खेत से बाहर न जाए, इसकी व्यवस्था की जाए। यह जल खेत के लिए अमृत समान होता है। ढैंचा की खेती करने से खरपतवार भी कम होते हैं। ढैचा के लिए 35 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है।