संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन शनिवार को विधायक सदर अंकुर राज तिवारी ने लोगों से मोटे अनाज की खेती करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि मोटे अनाज का सेवन हमारे पूर्वज किया करते थे, जिसमें बाजरा, ज्वार, सावां, कोदो, मडुआ के चावल, रोटी, खीर, खिचड़ी घरों में बनती थी, जिसके सेवन से शरीर स्वस्थ एवं निरोग रहता था। समय के साथ हमारे खाने का ढंग बदला और हमारी थाली में गेहूं चावल ने स्थान ले लिया और बीमारियां और स्वास्थ्य संबंधित समस्या होने लगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से श्री अन्न जो कभी गरीबों को अनाज हुआ करता था, आज पूरे विश्व में प्रचलित हो गया है। अमीर लोगों में इसकी मांग बढ़ गयी है। दिल्ली में आयोजित जी-20 सम्मेलन में श्री अन्न का भोजन परोसा गया, जो देश के उन्नत कृषि एवं संस्कृति की देन है। जिस प्रकार से श्री अन्न की मांग बढ़ रही है, आने वाले कुछ वर्षाें में इसकी कीमत में तेजी से वृद्धि होगी। किसान कृषि विभाग एवं कृषि वैज्ञानिकों की बताई हुई जानकारी एवं तकनीकी से मोटे अनाज पैदा करें। रासायनिक उर्वरकों, दवाई का कम से कम प्रयोग करें। सीडीओ संत कुमार ने कहा कि पूर्व में छानी की लौकी-सब्जी हुआ करती थी, उसके स्वाद एवं वर्तमान की लौकी सब्जी स्वाद में बहुत अंतर हो गया है। पहले के अन्न स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यवर्धक एवं रसायन से मुक्त थे, जिसकी इस समय बहुत आवश्यकता है। किसान खेती को जैविक ढंग से परंपरागत रूप में करें, जो उनके लिए आय के साथ-साथ अच्छी सेहत का भी स्रोत बनेगा। उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि जनपद के किसानों, उपभोक्ताओं एवं मोटे अनाज के विक्रेताओं को जोड़कर इस कार्य को चलाया जा रहा है ताकि आने वाले समय में जनपद मोटे अनाज के लिए एक अच्छा उत्पादक केंद्र बन सके।
इस अवसर पर प्रगतिशील कृषक सुरेंद्र राय, राम उजागर चौधरी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।