- नदी की धारा और एमबीडी बांध के बीच बचा है बमुश्किल 30 से 40 मीटर का फासला
- नदी का जलस्तर बढ़ने पर मच सकती है भारी तबाही
संवाद न्यूज़ एजेंसी
संतकबीरनगर। घाघरा नदी की धारा को मोड़ कर धनघटा तहसील क्षेत्र में बाढ़ से बचाव के लिए सात करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए लेकिन कामयाबी नहीं मिली। बल्कि नदी की धारा मुड़ने की जगह उत्तर की दिशा में बढ़ते हुए तुरकौलिया नायक गांव के पास एमबीडी बांध के करीब पहुंच गई। गांववालों का कहना है कि अगर नदी का जलस्तर बढ़ा और कटान शुरू हुई तो क्षेत्र में तबाही मच सकती है।
कभी अंबेडकरनगर, आजमगढ़ की सीमा में बहने वाली घाघरा नदी वर्ष 2013 से कटान करती हुई संतकबीरनगर जिले के धनघटा तहसील क्षेत्र में बहने लगी है। जिससे नदी के तटवर्ती गांव प्रत्येक वर्ष बाढ़ और कटान की दंश झेल रहे हैं। नदी की धारा को उत्तर की दिशा में बढ़ने से रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने पहले जिओ ट्यूब का प्रयोग किया। जब उससे भी पानी की गति नहीं थमी तो धारा को मोड़ने के लिए शासन को रिपोर्ट भेजा।
शासन ने सिंचाई विभाग की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कानपुर की एक कंपनी को नदी की धारा मोड़ने की दिशा में कार्य करने के लिए ठेका दे दिया। कंपनी की मशीन और मजदूरों ने बिड़हरघाट से लगायत कम्हरिया घाट तक जनवरी से लेकर जून तक कार्य किया। नदी की खुदाई कर उत्तर दिशा में ऊंचा किया गया। जिससे नदी का बहाव अपनी पुरानी जगह पर होने लगे। लेकिन कंपनी का प्रयास विफल होता दिखाई दे रहा है। नदी दक्षिण की दिशा में पहुंचने की जगह उत्तर की दिशा में बढ़ते हुए एमबीडी बांध तक पहुंच गई।
ग्रामीण वीरेंद्र, अशोक कुमार, अजय, कृष्ण चंद्र, रामजीत, राधेश्याम आदि का कहना है कि जब से बालू का खनन वैध और अवैध रूप से घाघरा नदी की किनारे से होना शुरू हुआ है तभी से नदी ने अपनी धारा परिवर्तित करना शुरू कर दिया है। धारा को मोड़ने के लिए शासन ने भले ही करोड़ों रुपये पानी में बहा दिए लेकिन नदी थोड़ी भी दक्षिण की दिशा में मुड़ नहीं सकी। जिसका नतीजा है कि नदी कटान करते हुए एमबीडी बांध के करीब पहुंचती जा रही है।
तुर्कवलिया नायक गांव के पास नदी की धारा और एमबीडी बांध के बीच 30 से 40 मीटर जमीन का फासला बमुश्किल रह गया है। इसके मद्देनजर सिंचाई विभाग बांध पर मिट्टी डालने के साथ बोल्डर लगाने का भी काम कर रहा है। ग्रामीण आशंकित हैं कि यदि नदी का जलस्तर बढ़ा और कटान शुरू हुआ तो एमबीडी बांध को भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। क्षेत्र में तबाही मच सकती है। ग्रामीणों ने इस दिशा में कारगर उपाय किए जाने की जरूत जताई है ।
इंसेट
नदी उत्तर की दिशा में जरूर बहने लगी है लेकिन एमबीडी बांध पर न तो कोई खतरा है और न ही आगे आने पाएगा। तुर्कवलिया नायक के पास एमबीडी बांध पर बोल्डर से पिचिंग कार्य किया ही गया है। साथ ही नदी के कटान को रोकने की जिओ ट्यूब का भी प्रयोग किया गया है। बांध को नदी से कोई खतरा नहीं होगा।
- सतीश चंद, सहायक अभियंता, ड्रेनज खंड