संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की तरफ से चलाए रहे ऑनलाइन संस्कृत भाषा शिक्षण कार्य का शुभारंभ बुधवार को खलीलाबाद सरस्वती शिशु मंदिर में हुआ। संस्कृत भाषा सिखाने का कार्य 20 दिनों तक चलेगा।
प्रशिक्षक शिवप्रताप मिश्र व विनोद त्रिपाठी ने ऑनलाइन संस्कृत पढ़ाने का कार्य शुरू किया। बताया कि दो कक्षाएं अलग-अलग समय से चलाई जा रही हैं। इसमें बहुत ही सरलतम ढंग से एक घंटे तक गीत संगीत से भाषा सिखाई जा रही है। यह कार्य 20 दिनों तक चलेगा। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा को सभी भाषाओं में उच्च स्थान प्राप्त है। इस कार्यक्रम के जरिये घर बैठे सरलतम ढंग से संस्कृत भाषा का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता हैं।
उन्होंने आग्रह किया कि जनगणना में लोग संस्कृत भाषा को स्थान देते हुए अपनी भाषा संस्कृत चुनें। इससे आने वाली पीढ़ी को बल मिलेगा। संस्कृत भाषा के बिना उन्नति नहीं हो सकती। निदेशक विनय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि संस्कृत भाषा वैज्ञानिकता को अपने अंदर समाहित किए है। यह एक भाषा ही नहीं बल्कि विद्या और संस्कार भी है। संस्कृत भाषा हमारे सर्वांगीण विकास में समस्त उन्नति यों का मूल है। हमें इस भाषा को अपने जीवन में धारण करना चाहिए।
इस अवसर पर समन्वयक धीरज मैथानी, राधा शर्मा ,चंद्रकला, दिव्य रंजन, मनीषा, बबीता मोनिका, मोहित, नितिन, रेखा, वीणा आदि लोग उपस्थित रहे।