-बिजली निगम को लगा रहे लाखों की चपत , फर्राटा भर रहे ई-रिक्शा
संवाद न्यूज एजेंसी
मेंहदावल। यूं तो शहर से लेकर गांवों तक ई-रिक्शा की बाढ़ आ गई है। लाइसेंस धारक हों या नाबालिंग, हर कोई ई-रिक्शा लेकर फर्राटा भर रहा है। बावजूद इसके ई-रिक्शा चार्ज करने के लिए कहीं भी चार्जिंग स्टेशन नहीं है। ऐसे में ई-रिक्शा चार्ज करने के लिए लोग घरेलू बिजली का उपयोग करते हैं। इससे पावर कारपोरेशन को प्रतिवर्ष लाखों रुपये का चूना लग रहा है।
जानकारों के मुताबिक एक ई-रिक्शा पर प्रतिदिन आठ यूनिट बिजली खर्च होती है। पावर कारपोरेशन की नियमावली में घरेलू बिजली से ई-रिक्शा चार्ज करना अपराध की श्रेणी में आता है। बावजूद इसके कहीं भी चार्जिंग प्वाइंट नहीं बनाया है। नतीजा, लोग घरेलू कनेक्शन से ई-रिक्शा चार्ज कर राजस्व को चपत लगा रहे हैं।
वैसे ई- रिक्शा की बैटरी को घरेलू की बजाय व्यावसायिक बिजली से चार्ज किया जाना चाहिए, लेकिन शहर में चल रहे सैकड़ों ई-रिक्शा घरेलू बिजली के दम पर सड़कों पर फर्राटे भर रहे हैं। घरेलू और वाणिज्यिक विद्युत दरों के बीच का अंतर 3.25 रुपये तक है, जिससे हर माह विद्युत निगम को लाखों रुपये की हानि हो रही है। इन पर रोक लगाने की पहल अब तक विद्युत निगम ने नहीं की।
नहीं चला जांच अभियान
यूं तो बिजली निगम के अधिकारी बकाया बिल वसूली के लिए निरंतर अभियान चलाने का दावा कर रहे हैं। पिछले माह अभियान चलाकर कई बकायेदारों के कनेक्शन भी काटे गए। वहीं ई-रिक्शा चार्जिंग के लिए घरेलू कनेक्शन के नाम पर बिजली का दोहन करने वालों पर अधिकारियों की नजर नहीं पड़ रही है।
घरेलू बिजली कनेक्शन से ई-रिक्शा चार्ज हो रहीं हैं तो यह नियम विरुद्ध है। ई-रिक्शाएं अगर इसी तरह चार्ज हो रही हैं तो इसकी दरों में काफी बड़ा अंतर होने से नुकसान हो रहा है। इसे रोकने के लिए प्लान तैयार कर अभियान चलाया जाएगा।
पीके गुप्ता, अधिशासी अभियंता, मेंहदावल