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Sant Kabir Nagar News: डॉक्टर को ओलैक्स पर बेचना था फर्नीचर, 98,000 रुपये के हो गए ठगी के शिकार

Thu, 17 Aug 2023 11:44 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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साइबर अपराधी ने बातों में फंसाकर पैसा ट्रांसफर करने के लिए मांग लिया क्यूआर कोड, पांच बार में उड़ा दी रकम
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शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में तैनात एक डॉक्टर को ओलैक्स पर पुराना फर्नीचर बेचना था, लेकिन साइबर अपराधी ने फ्राड करके इनके खाते से 98,000 रुपये उड़ा दिए। पीड़ित डॉक्टर ने इसकी सूचना एसपी को दी। एसपी ने मामले की जांच साइबर सेल को सौंप दिया है।
जिला अस्पताल में तैनात फिजिशियन डॉक्टर आनंद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि उन्हें घर का पुराना फर्नीचर बेचना था। इसकी सूचना ओलैक्स पर डाली थी। साइबर अपराधी ने बृहस्पतिवार को संपर्क साधा तो उनके हाईस्कूल में पढ़ने वाले बेटे हर्शल मिश्रा ने फोन उठाया। साइबर अपराधी ने बातों-बातों में बेटे को फंसा लिया और पैसा ट्रांसफर करने के लिए क्यूआर कोड मांगा। उसमें पहले दो रुपये भेजकर तस्दीक की और फिर पांच बार में 49, 24 और 10-10 हजार करके कुल 98,000 रुपये खाते से निकाल लिया। खाते से पैसा ट्रांसफर होने का संदेश मिला तो अवाक रह गए। इसकी शिकायत एसपी से की। एसपी ने साइबर सेल को मामले की जांच सौंप दी है। संवाद
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इंसेट
साइबर अपराधी बदल रहे ट्रेंड, रहें सावधान
संतकबीरनगर। बदलते दौर में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। साइबर अपराधी ट्रेंड बदल कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे है। पिछले वर्ष साइबर अपराध के 41 मामले दर्ज हुए थे, वहीं इस साल अब तक 28 मामले दर्ज हो चुके है। तमाम ऐसे लोग भी साइबर ठगी के शिकार हो जाते हैं लेकिन, सामाजिक भय की वजह से भी पुलिस तक मामला नहीं ले जाते है।
स्मार्ट फोन का चलन बढ़ गया है। अमूमन हर परिवार में लोग स्मार्ट फोन का प्रयोग कर रहे हैं। इधर, साइबर अपराधी लोगों को फोन करके आईफोन पर आफर होने की बात कहते हुए 25 से 50 प्रतिशत कीमत पर बेचने की के नाम पर ठगी कर रहे हैं। वार्ता के दौरान साइबर अपराधी यह भी कहते हैं कि मुझे कोई बैंक खाता नंबर या ओटीपी नहीं चाहिए, मुझे सिर्फ यह पता करना है कि आप के खाते में पर्याप्त धनराशि है अथवा नहीं। जो लोग तैयार हो जाते हैं, साइबर अपराधी मोबाइल पर वीडियो काल करके पहले मोबाइल के स्क्रीन पर खाते का बैलेंस दिखाता है, उसी दौरान साइबर अपराधी के जरिए संबंधित व्यक्ति को मोबाइल पर ओटीपी सेंड किया जाता है। वीडियो काल के दौरान व्यक्ति के मोबाइल पर ओटीपी आता है, जो स्क्रीन पर कुछ सेकंड के लिए दिखाई देता है। साइबर अपराधी ओटीपी देखकर उस व्यक्ति के खाते से पैसा निकाल लेता है।
इसी तरह साइबर अपराधी लोगों को पेंसिल पैकिंग की नाैकरी देने का झांसा देते हैं और फिर काॅल करके रजिस्ट्रेशन आदि के नाम पर अपने खाते में पैसा मंगाते हैं। बाद में जीएसटी आदि का हवाला देकर अपने खाते में पैसा मंगा लेते हैं। फिर पेंसिल की आपूर्ति का दबाव बना कर ठगी का शिकार बना लेते हैं। बिजली काट देने को लेकर भी साइबर अपराधी फोन करके ठगी का शिकार बना रहे हैं। झांसे में लेकर एटीएम कार्ड का नंबर पता कर लेते हैं और फिर खाते से ऑनलाइन खरीदारी कर लेते हैं।
केस नंबर-एक
सेवानिवृत्त फौजी के खाते से कर ली थी आठ लाख की खरीदारी
बखिरा क्षेत्र के मेडरापार गांव निवासी सेवानिवृत्त फौजी श्रीनिवास के खलीलाबाद स्थित मकान में रहने वाले एक किराएदार ने उनके एटीएम कार्ड का कोड नंबर जान लिया था। फिर उसने सीवीवी नंबर पता करके फि्लपकार्ड के जरिए करीब आठ लाख रुपये की खरीदारी कर ली। बाद में साइबर सेल के जरिए पता लगाया गया और महुली क्षेत्र का रहने वाला आरोपी पकड़ा गया।
केस नंबर- दो
कोतवाली क्षेत्र के बालूशासन के रहने वाले रंगीलाल जीप चलाते है। उनकी पत्नी के नाम से एक जीप थी। जिसे उन्होंने 84,000 रुपये में बेच दी थी। उनके पास नकदी हो गई थी। पांच अप्रैल को उसके बेटे प्रभाकर के फोन पर काॅल आई। फोन करने वाले ने व्हाट्सएप पर पुरानी बोलेरो की तस्वीर भेज दी और 1,10,000 रुपये में देने की बात की। वह तैयार हो गए। उसने पहले 15,000 रुपये एडवांस मांगा। फिर 14,999 रुपये मांगा और 50 किलोमीटर दूरी पर गाड़ी पहुंचने की जानकारी दी। फिर 10,000 रुपये मांगा, तब गाडी घर तक पहुंचने की बात की। उनके बेटे से फोन पे पर दो बार में 5,000 रुपये मंगा लिया, लेकिन गाड़ी नहीं भेजी। बाद में पता चला कि उनके साथ फ्राड हो गया है। इस मामले में कोतवाली में केस दर्ज है और पुलिस जांच कर रही है।
केस नंबर- तीन
कोतवाली क्षेत्र के दुघरा गांव निवासी दया शंकर राय के बेटे श्रेयांश राय ने आठ मई को इंस्टाग्राम पर विज्ञापन देखा। उसमें घर बैठे नटराज पेंसिल पैकिंग का विवरण दिया गया था। उनके बेटे ने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। उसके बाद उनके बड़े भाई की बेटी ने भी रजिस्ट्रेशन और अन्य खर्च के नाम पर करीब 13,319 रुपये ट्रांसफर कर दिए। भेजी गई रकम की डिटेल संबंधित पेंसिल कंपनी को भेजी गई, लेकिन कोई सामान उपलब्ध नहीं कराया गया। फ्राड की जानकारी होने पर चचेरे भाई-बहन परेशान हो गए। पीड़ित ने कोतवाली में केस दर्ज कराया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इंसेट
ऐसे करें बचाव
अज्ञात नंबर से फोन पर बात करते समय विशेष सावधानी बरते। अपना आधार, पैन व फोटो आदि जो भी डाक्यूमेंट बैंक में खाता खुलवाने में लगता है, उसे अज्ञात व्यक्ति को न दें। साथ ही अज्ञात व्यक्ति/नंबर से वीडियो काॅल करने से बचें।
- फोन में अगर अनजान व्हाट्सएप, टेक्स्ट या अन्य मैसेजिंग एप पर आए तो मैसेज में दी लिंक पर क्लिक न करें।
- किसी भी अनजान सोर्स की मदद से फोन में कोई भी एप इंस्टॉल न करें।
- अनजान नंबर से आने वाली मैसेज या कॉल पर जल्दी से भरोसा न करें और न ही अपनी डिटेल्स सामने वाले को शेयर करें।
- ओलैक्स पर डाले गए सामानों के खरीदने से पहले ठीक से जांच परख ले तथा वहां जाकर स्वयं देख ले । पहले ही उनकी बातों में आकर किसी प्रकार का शुल्क आदि न दें तथा ऑनलाइन पैसा देने से बचें।
- कम से कम 45 दिन में अपना पासवर्ड जरूर बदल लें।
- अपने प्राइमरी ई-मेल एड्रेस को कभी सोशल मीडिया साइट्स के लिए इस्तेमाल न करें।
- सोशल मीडिया साइट्स के लिए सेकेंडरी ई-मेल अड्रेस बनाकर रखें।
- अगर कोई अकाउंट आप इस्तेमाल नहीं करते हैं तो उसे डिलीट कर दें।
- किसी भी फ्री सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करने से पहले सॉफ्टवेयर और वेबसाइट होस्टिंग का पता लगा लें, ध्यान रखें कि सॉफ्टवेयर पब्लिश करने वाले वेबसाइट का कनेक्शन सिक्योर हो।
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- हमेशा प्रामाणिक व लाइसेंस वाले साॅफ्टवेयर का ही प्रयोग करें।
- ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय ध्यान रखें कि आपने URL को मैनुअली टाइप किया हो ।
- अज्ञात ई-मेल में आए किसी भी अटैचमेंट को डाउनलोड करने से बचें।
- जरूरी फाइल्स का रेग्युलर बैकअप लेते रहें। ऐसा करने से किसी भी रेनसमवेयर के अटैक से बचा जा सकता है।
- आप अपने जरूरी डॉक्यूमेंट्स को हमेशा एक्सटर्नल ड्राइव में बैक-अप लें।
- जब आप अपना ऑफिस छोड़ें तो यह सुनिश्चित कर लें कि कम्प्यूटर सही तरीके से बंद हो गया है या नहीं।
- अपना पासवर्ड किसी के साथ सांझा न करें, पासवर्ड की परिधि कम से कम 8 से 12 वर्णों की होनी चाहिए, जिसमें अक्षरों के साथ अंकों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
- सोशल मीडिया अकाउंट्स जैसे फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम इत्यादि पर अपनी गोपनीयता तथा सुरक्षा संबंधी विकल्पों को सक्षम करें।
- सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपने वीडियो/चित्रों को शेयर करते समय वॉटरमार्क का प्रयोग करें।
- एक वैध कस्टमर केयर नम्बर कभी भी 10 अंकों का मोबाइल नम्बर नहीं हो सकता जैसा कि आम तौर पर फर्जी मैसेज में दिया जाता है।
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