बेलहर में कथा कहते आचार्य धनंजय महाराज
लोहरौली। आदर्श नगर पंचायत बेलहर में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवे दिन आचार्य धनंजय ने प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान राम की बाल लीलाएं संसार की सकारात्मक और आनंदमयी लीलाएं हैं। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान की आरती और वंदना के साथ हुई। कथावाचक ने कहा कि पूजा में भाव की महत्ता होती है। प्रभु भक्त के भाव को देखते हैं। यदि हम राम को पाना चाहते हैं, तो वे हमें अनुराग से प्राप्त होंगे। प्रभु की छवि को ही मन में बसाना होगा। उन्होंने श्रीराम के जन्म का चित्रण करते हुए बताया कि जब श्रीराम ने दशरथ नंदन के रूप में कौशिल्या की कोख से जन्म लिया, तो दासियां दौड़ पड़ीं। अयोध्या सजने लगी और जन-जन में उत्साह छा गया। पूरे अयोध्या में शहनाई की आवाज गूंज रही थी। उन्होंने कहाकि भगवान राम की बाल लीला में ही उनका साम्यवादी चिंतन और क्रियात्मक रूप स्पष्ट होता है। जब वे दशरथ के आंगन में विहार करते हैं और महाराज दशरथ उन्हें भोजन के लिए बुलाते हैं, तो वे समता के पोषक होकर अपने बाल सखाओं के साथ खेलते हैं। अंत में आरती के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।