धनघटा। क्षेत्र के गायघाट दक्षिणी, दौलतपुर, कंचनपुर, जगदीशपुर गांव के सौ से अधिक किसानों के लिए सरयू नदी अभिशाप बन गई है। तीन दिनों में सरयू नदी 500 बीघा फसल समेत खेत को अपनी धार में समाहित कर लिया। किसानों का कहना है कि नदी का कटान इसी तरह जारी रही तो यहां के लोग भूमिहीन हो जाएंगे।
सरयू नदी की धारा संतकबीरनगर जिले की सीमा में कई वर्षों से बह रही है। नदी का पानी बढ़ता है तो नदी और एमबीडी बांध के बीच बसे गांव के लोग बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। पिछले वर्ष हुए कटान से गायघाट दक्षिणी गांव के 47 लोगों का मकान नदी में समाहित हो गया था। इस वर्ष नदी के बढ़ते जलस्तर के बाद भी कटान थमी हुई थी। लेकिन इधर, नदी जलस्तर में गिरावट शुरू हुई तो क्षेत्र के पूर्वी इलाके में नदी तेजी के साथ कटान करने लगी।
किसान लालचंद, इंद्रजीत, ईश्वर चंद, ईशदत, बालेंद्र, किशोरी, बुधिराम, सुरेंद्र, दिलीप, रामप्रताप आदि का कहना है कि तीन दिनों से कटान हो रहा है। यदि इसी तरह से कटान रही तो इस बार गायघाट दक्षिणी गांव का अस्तित्व समाप्त हो सकता है। किसानों का कहना है कि कटान को रोकने के लिए उपाय करने की मांग लंबे समय से हो रही है। लेकिन रोकने की बात संभव न होने की बात कहकर जनप्रतिनिधि और अधिकारी हाथ खड़ा कर दे रहे हैं। नदी और बांध के बीच बसे गांव के लोग भगवान भरोसे आपदा का सामना कर रहे हैं।
इस संबंध में एसडीएम रमेश चंद्र का कहना है कि किसानों का हो रहे नुकसान का आकलन करने का निर्देश दिया गया है। नुकसान की रिपोर्ट आ जाने के बाद उसे उच्चाधिकारियों के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा।