बिजली कर्मियों की हड़ताल : घरों में लगी पानी की टंकियां सूखी, लोगों की परेशानी बढ़ी
मोमबत्ती के सहारे बच्चे कर रहे हैं पढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। बिजली कर्मियों की 72 घंटे की हड़ताल ने शनिवार को लोगों की मुसीबतें और बढ़ा दी है। शाम होते ही जिले के करीब 1200 गांव अंधेरे में डूब जा रहे हैं। बड़े और लघु उद्योगों के पहिए थम गए हैं। लोगों के घरों की छप पर लगीं पानी की टंकियां सूख गई हैं। लोग जैसे-तैसे हैंडपंप के पानी से गुजर-बसर कर रहे हैं। इन्वर्टर जवाब दे गए हैं। मोबाइल फोन चार्ज नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में लोगों का एक-दूसरे से संपर्क टूट गया है। मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई करने के लिए बच्चे मजबूर हैं।
बिजली कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर 16 मार्च की रात दस बजे से बिजली कर्मी हड़ताल पर हैंं। इससे लगातार बिजली आपूर्ति व्यवस्था ध्वस्त हो रही है। 11 बिजली उपकेंद्र बंद हो गए हैं। शाम को बिजली के अभाव में गांवों की गलियों के साथ लोगों के घरों में अंधेरा छा जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। गृहिणी भी परेशाान हैं। मोटर न चलने से घर की छतों में पानी के लिए लगाई गई टंकियां सूख गई है। इससे भोजन बनाने से लेकर अन्य कार्यों में समस्या खड़ी हो गई है। मोबाइल फोन चार्ज न होने से लोगों का संपर्क एक-दूसरे से टूट गया है। घर में टीबी, कूलर, पंखा शोपीस हैं। उपभोक्ता मनोज कुमार, सुनील कुमार, अनीता देवी आदि ने बताया कि बिजली न रहने से दिनचर्या प्रभावित हो गई है।
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पावरलूम और होजरी की मशीनें बंद
जनपद बुनकर बाहुल्य है। यहां के बुनकरों की रोजी-रोटी पावरलूम पर निर्भर है। बिजली न रहने से पावरलूम बंद हो गए हैं। बुनकरों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। होजरी के कारोबारी भी परेशान हैं, क्योंकि बिजली के अभाव में मशीनें बंद हो गई हैं। उद्योग-धंधों पर भी असर पड़ रहा है।
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बिजली से चलने वाले उपकरण बने शोपीस
बिजली से चलने वाले उपकरण शोपीस बन गए हैं। बिजली से चलने वाली आटा की चक्की भी बंद हो गई है। लोग गेहूं की पिसाई कराने के लिए भटकने को मजबूर हैं। जिन लोगों ने सब्जी की खेती की है, वह सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।
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बिजली निगम के अधिकतर कर्मियों के मोबाइल फोन बंद
हड़ताल पर गए बिजली कर्मियों ने अपना मोबाइल फोन नंबर बंद कर रखा है, जिसके कारण कर्मियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। जो लोग कंट्रोल रूम में शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, उन्हें भी राहत नहीं मिल पा रही है। कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें बिजली निगम के अधिकारियों को भेजा जा रहा है, लेकिन आपूर्ति शुरू नहीं हो पा रही है।