फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sant Kabir Nagar News: त्याग व बलिदान का पर्व है ईद-उल-अजहा

Sun, 25 Jun 2023 11:32 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
विज्ञापन
विज्ञापन
सेमरियावां। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व त्याग, बलिदान और खुदा से बेपनाह मोहब्बत करने की सीख देता है। यह पर्व इस्लामी कैलेंडर के दसवीं जिलहिज्जा माह को अल्लाह के पैगंबर हजरत इब्राहीम खलीलुल्लाह की याद में मनाया जाता है। इस दिन मुसलमान जज्बे से भरा होता है, और अल्लाह की राह में सब कुछ कुर्बान करने लिए तैयार रहता है।
विज्ञापन

अरबी महीना जिलहिज्जा का चांद 19 जून को देखा गया है। इस बार ईद उल अजहा का पर्व 29 जून को मनाया जाएगा। वैसे यह त्योहार तीन दिन तक मनाया जाता है। ईद उल अजहा की तैयारी के लिए कपड़े व कुर्बानी के जानवर की खरीदारी शुरू कर दी गई है। आल इंडिया उलेमा बोर्ड के प्रदेश महासचिव फुजैल अहमद नदवी ने बताया कि ईद-उल-अजहा का इतिहास बहुत पुराना है। अल्लाह हजरत इब्राहीम का इम्तेहान लेना चाहते हैं। हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने एक रोज अरबी माह जिलहिज्जा की आठवीं रात को ख्वाब देखा कि वह अपने सात वर्षीय इकलौते प्रिय बेटे हजरत इस्माइल को जिबह कर रहें हैं। चूंकि ख्वाब हुक्म नहीं होता है, इसलिए हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने सुबह सौ ऊंट की कुर्बानी दी। दूसरे दिन नौवीं जिलहिज्जा की रात को फिर वही ख्वाब देखा, तो फिर सुबह सौ ऊंट की कुर्बानी कर दी। तीसरे दिन दसवीं जिलहिज्जा की रात भी फिर वही ख्वाब देखा तो आप समझ गए कि अल्लाह बेटा हजरत इस्माइल की कुर्बानी चाहते हैं। जो उन्हें बेहद प्रिय है।
बताया जाता है कि खुदा से काफी दुआ करने पर हजरत इब्राहीम को सौ साल की उम्र में हजरत इस्माइल के रूप में बेटा मिला था। हजरत इब्राहीम अल्लाह की चाहत के लिए बेटे की कुर्बानी के लिए तैयार हो गए। इसके बाद अपने बेटे इस्माइल से ख्वाब बताया, इस्माइल बच्चे थे। फिर भी फौरन तैयार हो गए और कहा कि अब्बा जान अपना ख्वाब पूरा कर दीजिए। मुझे सब्र करने वाला पाएंगे, लेकिन जिबह करने से पहले मेरी तीन बातों पर ध्यान देना दीजिए। मेरे पैरों में रस्सी बांध दीजिए, अपनी आंखों पर पट्टी बांध लीजिए और खून से सना कुर्ता मां को नहीं दिखाएंगे।
विज्ञापन

इस्माइल की बातों पर अमल करते हुए हजरत इब्राहीम ने बेटे की गर्दन पर छुरी चला दी। जब हजरत इब्राहीम ने आंख से पट्टी खोली तो देखा बेटे की जगह एक दुंबा जानवर कटा पड़ा है, और बेटे इस्माइल फरिश्ते जिब्राईल के साथ दूर खड़े मुस्करा रहे हैं। हजरत इब्राहीम का इम्तेहान लेना खुदा का सिर्फ मकसद था। अल्लाह के हुक्म पर जिब्राईल ने जन्नत से दुंबा लाकर इस्माइल को हटा कर रख दिया था।
ईस्माईल की जगह दुंबा जबह हुआ। तभी से ईद उल अजहा (बकरीद) का पर्व पर पाक जानवरों की कुर्बानी की परंपरा चली आ रही है। मौलाना सलमान कबीरनगरी ने बताया कि मुसलमान अपने प्रिय पाक जानवरों की कुर्बानी करते हैं। इससे सवाब मिलता है। अल्लाह का सच्चा बंदा वह है जो अल्लाह को खुश करने के लिए अपनी तमाम ख्वाहिशें, जानमाल की कुर्बानी के लिए तैयार रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें