संतकबीरनगर। एचआर पीजी कॉलेज में चल रहे संस्कृत भारती के आवासीय संभाषण शिविर संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार पर जोर दिया गया। इसके साथ ही समाज को संस्कृत मय करने का संकल्प लिया। इस दौरान शिविर के समापन की घोषणा हुई। बुधवार की भोर में दीपोत्सव कार्यक्रम आयोजित होगा।
मुख्य अतिथि संस्कृत भारती के प्रांत सह मंत्री नागेश दूबे ने कहा कि अपना काम ईमानदारी और लगन से करने पर आगे ही बढ़ने का मौका मिलता है। आरएसएस के प्रांत प्रचारक सुभाष ने कहा कि संघ की समस्त आज्ञा तथा प्रार्थना संस्कृत में ही है। संघ शाखा पर प्रतिदिन संस्कृत सुभाषित का पारायण होता है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत के संवर्धन हेतु संस्कृत भारती जन- जन तक संस्कृत पहुंचाने का जो कार्य कर रही है उसकी गति बढ़ाने की आवश्यकता है।
इलाहाबाद से आए संस्कृत भारती के पूर्व उत्तर प्रदेश क्षेत्र संगठन मंत्री देवेंद्र पंडया ने कहा कि भारत का आत्मबोध का जागरण कराने के लिए संस्कृत ही सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। संस्कृत भारती के आवासीय वर्ग के माध्यम से भारत के गौरव का परिचय संस्कृत संभाषण के बिना संभव नहीं है क्योंकि भारत हमारे ऋषि मुनियों का दिग्दर्शक संस्कृत भाषा में ही है। जिसे पूरा विश्व स्वीकार करता है और सभी समस्याओं के समाधान के लिए भारत की ओर देखता है।
भारत के आत्मबोध के जागरण के लिए सर्वश्रेष्ठ साधन संस्कृत ही है। विश्व सभ्यता के विकास की आधारशिला है। सत्यम पांडेय ने कहा कि संस्कृत के लिए नौजवानों को आगे बढ़कर काम करना होगा। गोरक्ष प्रांत के संगठन मंत्री डॉ. प्रकाश झा ने कहा कि संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार हेतु 21 गांवों में बाल संस्कार केंद्रों तथा गोरक्ष प्रांत के 51 स्थानों पर संस्कृत संभाषण शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिसके जरिये एक हजार से अधिक संस्कृत भाषियों का निर्माण जाएगा।
कार्यक्रम में मंच संचालन अंजली त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कृष्ण ओझा, गणेश दूबे, डॉ. जोखन पांडेय, विनोद कुमार त्रिपाठी, शिव प्रताप मिश्र, शिवम तिवारी, अंजली त्रिपाठी, श्रीप्रकाश ओझा, अपर्णा त्रिपाठी, अमीषा गिरी, मयंक त्रिपाठी, आकांक्षा त्रिपाठी, अमिता जायसवाल, तन्वी पांडेय, शिवा पांडेय, सत्यम पाठक आदि मौजूद रहे।