संतकबीरनगर। हैंसर बाजार और पौली क्षेत्र में लगाए गए सरकारी राजकीय नलकूप कहीं तकनीकी तो कहीं नाली की खराबी के कारण बंद पड़े हैं। धान की नर्सरी डालने के साथ ही धान की रोपाई का काम किसानों के सामने आ पड़ा है। सरकारी संसाधन खराब होने के कारण किसान पंपिंग सेट के जरिये सिंचाई अधिक लागत से कर रहे हैं। जबकि सरकारी नलकूपों की सिंचाई शासन ने मुफ्त कर दी है। इसका लाभ यहां के किसानों को नहीं मिलने रहा है।
नाथनगर ब्लॉक क्षेत्र के किसान कुआनो पंप कैनाल से सिंचाई करते हैं, तो हैंसर और पौली ब्लॉक के किसानों की खेती सरकारी नलकूपों के सहारे हुआ करती थी। वर्ष 1995 में सरकार ने अपने नियमों में परिवर्तन करते हुए सरकारी राजकीय नलकूपों की देखरेख का काम कुछ समय के लिए ग्राम पंचायतों के हवाले कर दिया। यहीं से सरकारी नलकूपों के साथ किसानों की किस्मत में खराबी आनी शुरू हो गई। 2010 के दशक में शासन एक बार फिर नलकूपों पर नलकूप चालकों की नियुक्ति तो की, लेकिन उसकी मरम्मत पर उतना ध्यान नहीं दिया जितना पहले दिया करती थी। इसका नतीजा यह हुआ कि नलकूपों की नालियां धीरे-धीरे ध्वस्त होती गईं और नलकूप बंद होते चले गए।
ग्राम गोपीपुर में लगा नलकूप फेल होकर 10 वर्षों से बंद है, तो मुंडेरा, प्रजापतिपुर, डेफरा, बैकुंठपुर, रूपिन, बंडा बाजार, बरपरवा, सिरसी, ठकुराडाडी, धनघटा, मुठही कला का नलकूप कुलावा की खराबी के कारण बंद है। कई गांव में लगे नलकूप तकनीकी खराबी का शिकार होकर मरम्मत की राह निहार रहे हैं। किसान राम लौट चौधरी, रामाशीष, महेंद्र कुमार, शिव कुमार सिंह, जयप्रकाश, रमेश चंद्र, रामनिवास, राम सुभग आदि का कहना है कि सरकारी नलकूप जब ठीक हुआ करते थे, तो उसके सहारे सिंचाई का कार्य आसानी से हो जाया करता था। हालांकि उस समय सिंचाई भी देनी पड़ती थी, लेकिन सरकार ने जब से सिंचाई माफ की है तभी से नलकूपों में आने वाली खराबी की मरम्मत की तरफ नलकूप विभाग का ध्यान भी जाना कम हुआ। अब शायद ही कोई ऐसा गांव होगा जहां का नलकूप सही ढंग से चलता होगा।
0000000000000000000
गोपीपुर में लगाया गया नलकूप फेल है। उसे दूसरी जगह लगाने के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन मिलते ही वहां दूसरा नलकूप लगा दिया जाएगा। जिन नलकूपों की नाली या कुलावा खराब है, उसकी मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। तकनीकी कारणों से बंद पड़े नलकूप भी जल्दी ठीक कर दिए जाएंगे। कोशिश है कि किसानों को सरकारी नलकूपों से सिंचाई की सुविधा अधिक से अधिक मिल सके।
- पंकज चौधरी, सहायक अभियंता, नलकूप खंड द्वितीय, उपखंड पंचम