डीएफओ ने रविवार को धनघटा तहसील क्षेत्र के आरा मशीनों पर छापेमारी की। इस छापेमारी से क्षेत्र में अवैध कटान करने वाले माफिया में हड़कंप मचा रहा। वन विभाग की टीम ने आरा मशीन पर स्टॉक किए गए लकड़ी के बोटे की प्रजाति और लाइसेंस की क्षमता की भी जांच की।
डीएफओ केडी सिंह ने रविवार को विभागीय सहकर्मियों के साथ महुली, धनघटा, लहुरेगांव और नावन में स्थित आरा मशीनों पर ताबड़तोड़ छापेमारी किया। उन्होंने बताया कि महुली में स्थित हकीकुल्लाह, लालजी, जबीउल्लाह और हाजी अजीजुलहक की आरा मशीनों पर छापेमारी की गई। इसके अलावा धनघटा में शिवप्रसाद, लहुरेगांव में रामललित शर्मा एवं कुलबुल, नावन में अब्दुल कुद्दुस की मशीनों पर छापेमारी की गई है। सभी मशीनों पर उपलब्ध स्टॉक की गणना की जा रही है। क्षमता से अधिक स्टॉक मिला तो संबंधित आरा मशीनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों जैसे आम, महुआ, नीम आदि की लकड़ियां बिना परमिट के पाई गईं। तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई तय है। छापेमारी के बाद विभाग की टीम सभी आंकड़ों को साथ लेकर धनघटा स्थित विभाग के अतिथि गृह के लिए रवाना हो गई। उन्होंने बताया कि स्टॉक और क्षमता मिलान के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। इस छापेमारी से क्षेत्र के कटान माफिया में दिन भर हड़कंप मचा रहा। इस दौरान वन रेंजर उदयभान सोनकर, दरोगा रमेशचंद्र श्रीवास्तव, दुर्विजयनाथ दूबे, रणविजय, गिरीश यादव, वनरक्षक इंद्रमणि, राजमन यादव, लालचंद आदि मौजूद रहे।