शुक्रवार को जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने काली पट्टी बांध कर काम किया।
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संयुक्त जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बृहस्पतिवार रात चिकित्सक और वार्ड ब्वाय को पीटने वाले दो नामजद आरोपियों समेत कुछ अज्ञात लोगों पर शुक्रवार को पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। उधर, चिकित्सक के साथ मारपीट की सूचना पर गुरुवार रात दो बजे तक स्वास्थ्य कर्मियों ने इमरजेंसी सेवाएं ठप कर दी थी। जबकि शुक्रवार को काली पट्टी बांध कर काम किया। कोतवाल के मुताबिक पकड़े गए आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। घायलावस्था में पकड़े गए आरोपी का उपचार कराने उसे साथी ले गए थे। न्यायाधीश ने संतोष की हालत देखकर पुलिस को उसे बस्ती के ओपेक कैली अस्पताल में भर्ती कराने का निर्देश दिया।
दरअसल, गुरुवार रात इमरजेंसी में डॉक्टर संजीत मिश्रा व स्वास्थ्य कर्मी भानू प्रताप, पवन कुमार, सुनील कुमार व फार्मासिस्ट एके वर्मा ड्यूटी पर थे। इस दौरान कुछ लोग करीब दस बजे एक घायल युवक को लेकर आए और उपचार करने के लिए कहा। चिकित्सक उपचार कर रहे थे कि इसी दौरान साथ आए लोग उनसे उलझ गए। इस दौरान इन लोगों ने डॉक्टर संजीत मिश्र और वार्ड ब्वॉय भानू प्रताप को मारना पीटना शुरू कर दिया। जानकारी होने पर अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौके पर पहुंच गए और बीच बचाव कर चिकित्सक को बचाया। इसी बीच हमलावर और घायल युवक फरार हो गए। सूचना के बाद सीएमएस डॉक्टर अजीत श्रीवास्तव और स्टाफ के लोग वहां पहुंचे। नाराज स्वास्थ्य कर्मियों ने इमरजेंसी सेवाएं ठप कर दी और हमलावरों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग करने लगे।
घायल चिकित्सक की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने मटिहना निवासी संतोष पुत्र प्रेमचंद और आरती पत्नी परदेशी निवासी कांशीराम आवास बगहिया पर सरकारी काम में बाधा, मारना पीटना और मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत केस दर्ज किया। आरोपी संतोष को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि चिकित्सक संजीत मिश्र की तहरीर पर दो नामजद और कुछ अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोपी संतोष को गिरफ्तार भी कर लिया गया। अन्य की तलाश की जा रही है।
निंदा कीः प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के अध्यक्ष डॉक्टर महेश प्रसाद ने घटना की घोर निंदा की है। जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर हमलावरों को गिरफ्तार किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी चिकित्सकों पर हमले हो चुके है। ऐसे में रात के समय इमरजेंसी में पुलिस की ड्यूटी लगाई जाए। जिससे की चिकित्सक बिना डर के काम कर सकें। अगर जल्द से जल्द हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो ओपीडी की सेवाएं ठप कर दी जाएगी।