हैंसर। घाघरा नदी के किनारे छपरा मगर्वी गांव के दक्षिण में बालू खनन का मामला फिर गरमा गया है। 22 फरवरी को खनन का पट्टा होने के बाद गांव के कुछ लोगों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में अपील की। एनजीटी ने आठ मार्च को सुनवाई की तिथि निर्धारित करते हुए डीएम व खनन निरीक्षक से जवाब तलब किया है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि यहां बालू का खनन किया गया तो छपरा मगर्वी गांव नदी की धारा में विलीन हो जाएगा।
वर्ष 2017 में यहां छह माह के लिए बालू खनन का पट्टा हुआ था। बालू खनन न करने देने की जिद पर अड़े गांव के लोगों और पुलिस के बीच संघर्ष भी हुआ था। पूर्व एसओ समेत कई लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने गांव वालों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया था।
अब भी कई लोग जेल में बंद हैं। इस बार पुन: वहां खनन कराने के लिए प्रशासन ने टेंडर जारी किया। 22 फरवरी को टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण हो गई। इसकी भनक गांव के लोगों को लगी तो देवेंद्र यादव, दुर्विजय, फूूलचंद समेत 40 लोगों ने डीएम से पट्टा न करने की गुजारिश की। साथ ही एनजीटी में अपील कर दी।
मुख्य अपीलकर्ता देवेंद्र ने बताया कि एनजीटी ने गांव वालों की अपील स्वीकार करते हुए डीएम से दो सप्ताह के अंदर जवाब मांगते हुए पर्यावरण के लिहाज से एनओसी देने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही सुनवाई की अगली तिथि आठ मार्च को निर्धारित की है।
देवेंद्र यादव ने बताया कि यदि बालू का खनन करने का पट्टा पांच साल के लिए छपरा मगर्वी में किया जाता हैं तो पूरा गांव नदी की धारा में समा सकता हैं। खनन निरीक्षक सुनील कुमार मौर्य ने बताया कि गांव के कुछ लोगों ने एनजीटी में अपील की है। सुनवाई के दिन बिंदुवार जवाब लगाया जाएगा। वैसे 22 फरवरी को जिस व्यक्ति के नाम टेंडर फाइनल हुआ है, उसने अभी तक मांगे गए जरूरी प्रमाणपत्र कार्यालय में जमा भी नहीं किए हैं।